टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़ और तनाव के बीच नींद का चक्र पूरी तरह से बिगड़ गया है। हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि नींद की गुणवत्ता और अवधि का सीधा संबंध हमारी जैविक उम्र (Biological Age) से है। न केवल कम सोना, बल्कि जरूरत से ज्यादा सोना भी शरीर के भीतर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
नींद और जैविक घड़ी का गहरा संबंध
विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर की अपनी एक आंतरिक घड़ी होती है, जिसे ‘सर्कैडियन रिदम’ कहा जाता है। जब हम इस लय को बाधित करते हैं, तो कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शोध बताते हैं कि जो लोग सात से आठ घंटे की आदर्श नींद नहीं लेते, उनमें डीएनए डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का स्तर अधिक पाया गया है।
अति सर्वत्र वर्जयेत: ज्यादा सोना भी खतरनाक
अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा सोने से शरीर को आराम मिलता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान इसे अलग नजरिए से देखता है। लंबे समय तक अत्यधिक नींद लेना शरीर में सुस्ती और मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों को जन्म देता है, जो उम्र बढ़ने के संकेतों को जल्दी उजागर कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की अनियमितता केवल थकान का कारण नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंगों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का आधार बनती है।
स्वस्थ नींद के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- प्रतिदिन एक ही समय पर सोने और जागने का नियम बनाएं।
- सोने से कम से कम एक घंटा पहले डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाएं।
- दिन में झपकी लेने की अवधि 20-30 मिनट से अधिक न रखें।
- कैफीन और भारी भोजन का सेवन रात के समय न करें।
निष्कर्ष यह है कि संतुलित नींद न केवल आपको मानसिक रूप से सक्रिय रखती है, बल्कि यह आपकी त्वचा, हृदय और मस्तिष्क की उम्र को भी नियंत्रित करने में मदद करती है। अपनी जीवनशैली में सुधार कर आप समय से पहले बूढ़े होने की प्रक्रिया को काफी हद तक थाम सकते हैं।



















