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पंजाब में भाईचारे की मिसाल: गुरुद्वारे में अदा की गई मुस्लिम अधिवक्ता की प्रार्थना सभा

पंजाब में भाईचारे की मिसाल: गुरुद्वारे में अदा की गई मुस्लिम अधिवक्ता की प्रार्थना सभा

टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: पंजाब की धरती हमेशा से ही साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे की मिसाल रही है। इसी कड़ी में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक सिख गुरुद्वारे ने मानवता का परिचय देते हुए एक मुस्लिम अधिवक्ता की तीसरी की रस्म (प्रार्थना सभा) के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। यह आयोजन न केवल धार्मिक सीमाओं को पार करने वाला था, बल्कि समाज के लिए एकता का एक बड़ा संदेश भी है।

गुरुद्वारे में गूंजी कुरान की आयतें

अधिवक्ता शफिया के निधन के बाद उनके परिवार को प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए स्थान की कमी महसूस हो रही थी, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कोई मस्जिद उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने आगे बढ़कर परिवार की मदद की पेशकश की। गुरुद्वारे के प्रांगण में एक ओर जहाँ कुरान की आयतें पढ़ी गईं, वहीं दूसरी ओर सिख मर्यादा के अनुसार अरदास भी की गई।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत किसी भी मजहब से बड़ी है। जब हमने देखा कि परिवार को जगह की जरूरत है, तो हमने बिना किसी संकोच के गुरुद्वारे के द्वार खोल दिए। – गुरुद्वारा प्रबंधन समिति सदस्य

800 से अधिक लोगों ने दी श्रद्धांजलि

इस अनूठे आयोजन में करीब 800 ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। इसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग शामिल थे, जिन्होंने एक साथ बैठकर दिवंगत अधिवक्ता को श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि पंजाब की रवायत में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और यहाँ के लोग आज भी एक-दूसरे के दुख-सुख में ढाल बनकर खड़े रहते हैं।

इस आयोजन के मुख्य बिंदु:

  • गुरुद्वारे में मुस्लिम रस्मों के साथ प्रार्थना सभा का सफल आयोजन।
  • विभिन्न समुदायों के 800 से अधिक लोगों की उपस्थिति।
  • सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मिला बढ़ावा।
  • पंजाब की गंगा-जमुनी तहजीब की एक और मिसाल।

यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा बनी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब सराहना हो रही है। लोग इसे आज के दौर में सबसे बड़ी जरूरत बता रहे हैं, जहाँ धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ाने की कोशिशें की जाती हैं।

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