टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ऐसा कोई नियम नहीं है जो एयरपोर्ट संचालकों को एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश करने से रोकता हो। हालांकि, इस विषय पर सरकार अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श जारी है।
क्या एयरपोर्ट और एयरलाइन का एक होना सही है?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मुद्दे के नफा-नुकसान को बारीकी से तौल रहा है। मंत्री ने कहा कि यह एक जटिल विषय है जिसमें प्रतिस्पर्धा और परिचालन दक्षता जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमानन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और यात्रियों को इसका लाभ मिले।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, ‘हमने अभी तक इस संबंध में कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है। हम सभी हितधारकों के साथ परामर्श कर रहे हैं और इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है।’
प्रमुख बिंदु
- वर्तमान में एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइन स्वामित्व पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।
- सरकार इस मॉडल के संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) की जांच कर रही है।
- मंत्रालय का जोर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने पर है।
- अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी सुरक्षा और आर्थिक पहलुओं पर गहन अध्ययन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एयरपोर्ट कंपनियां एयरलाइंस में हिस्सेदारी रखती हैं, तो इससे बुनियादी ढांचे के उपयोग में सुधार हो सकता है, लेकिन साथ ही एकाधिकार की स्थिति पैदा होने का खतरा भी बना रहता है। सरकार का रुख फिलहाल सतर्क है और वह जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने से बच रही है।



















