द टारगेट न्यूज़:
खरड़ अनाज मंडी में मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर कई किसान नेताओं ने धान की सरकारी खरीद अचानक रोके जाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान नेताओं मिहर सिंह थेरी और जसपाल सिंह नियामिया ने आरोप लगाया कि सरकार ने धान की खरीद के लिए 15 नवंबर की आखिरी तारीख तय की थी। इसके बावजूद मंडियों में भारी मात्रा में धान अब तक खुले में पड़ा है और खरीद का काम बंद कर दिया गया है। किसान नेताओं ने बताया कि खरीद बंद होने की वजह से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप था कि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, बल्कि आढ़तियों को केवल मौखिक रूप से धान न खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। जसपाल सिंह नियामिया ने कहा कि खराब मौसम के कारण पहले ही किसान तमाम समस्याओं से जूझ रहे थे, और अब खरीद प्रक्रिया रुकने से उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि खरीद का काम जल्द दोबारा शुरू नहीं किया गया, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, अधिकारियों ने इस मामले पर सफाई देते हुए बताया कि खरड़ अनाज मंडी में निर्धारित लक्ष्य का लगभग 130 प्रतिशत धान खरीदा जा चुका है, जो तय सीमा से काफी अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को भेजी गई सूची में इस मंडी के लिए निर्धारित लक्ष्य से 30 प्रतिशत अधिक खरीद पहले ही पूरी हो चुकी है।













