नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Political row over SIR; CJP sets 48-hour deadline) देश में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक संगठनों के बीच विवाद तेज होता नजर आ रहा है। इसी मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने CEC के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा। दीपके ने CEC पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें “भारत का दुश्मन” तक कहा है।
13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर होने का दावा
विवाद की जड़ SIR प्रक्रिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार से जून 2025 में शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। यह नाम हटना अंतिम रूप से मताधिकार खत्म होना नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के प्रावधान हैं।
CJP का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है।
दो चुनाव आयुक्तों की 10 महीने में 14 आपत्तियां
SIR विवाद को उस रिपोर्ट ने और बढ़ा दिया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों या आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने, वोटर डेटाबेस तक पहुंच, Form-6 और डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन खबरों पर अलग पक्ष सामने आया है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए। यह प्रतिक्रिया 14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट सामने आने के बाद आई।
CJP का देशभर में अभियान का ऐलान
CJP की ओर से आगे आंदोलन और जनसंपर्क अभियान की बात भी कही गई है। पार्टी पहले ही ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से अभियान चलाने की घोषणा कर चुकी है, जिसके तहत गांवों और शहरों में युवाओं से संवाद कर बेरोजगारी और महंगी शिक्षा जैसे मुद्दे उठाने की बात कही गई थी।
अब SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में कितने नाम बहाल या हटाए जाते हैं।


















