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कांग्रेस नेता को SC से झटका! चुनाव याचिका पर ट्रायल रोकने की मांग खारिज

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

 

(Setback for Congress leader from the SC! Plea to halt trial in election petition rejected)  छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी नई याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव याचिका पर सुनवाई आगे बढ़नी चाहिए और मुकदमे में देरी की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान देरी को लेकर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति मोहना ने बघेल के वकीलों से कहा, “ट्रायल आगे बढ़ने दीजिए। आप जितना संभव हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। इस मामले में फैसला होगा।”

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी

दरअसल, भाजपा नेता विजय बघेल ने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मतदान से पहले अनिवार्य 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने निर्वाचन क्षेत्र में जुलूस निकाला था। विजय बघेल ने उनका चुनाव रद्द करने की मांग की है।

भूपेश बघेल ने इस याचिका की वैधता पर शुरुआती सुनवाई कराने की मांग की थी। उनका तर्क था कि चुनाव याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिन की समय-सीमा के बाद दाखिल की गई।

अदालत ने वकीलों से पूछे सवाल

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रारंभिक मुद्दे पर विचार नहीं करके गलती की है। उन्होंने कहा कि अदालत को समय-सीमा से जुड़े सवाल पर फैसला करना चाहिए था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई और लिखित जवाब में संशोधन की मांग क्यों नहीं की गई। पीठ ने कहा कि समय-सीमा का सवाल तथ्यों और कानून दोनों से जुड़ा है, इसलिए इसके लिए उचित आधार जरूरी है।

45 दिन की समय-सीमा को लेकर विवाद

भूपेश बघेल की ओर से पहले दलील दी गई थी कि विजय बघेल के हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख है, जबकि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित 45 दिन की अवधि 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा था कि तारीखों की सत्यता और उनके कानूनी प्रभाव का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर होगा।

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने वरिष्ठ वकीलों के अनुरोध पर याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने से परहेज किया।

अब पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ी याचिका पर निचली अदालत में आगे सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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