चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। उनका कार्यकाल 27 सितंबर को समाप्त होना था, जिसे अब 27 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। हालांकि, नियमित नियुक्ति होने या केंद्र के अगले आदेश तक, इनमें से जो पहले हो, तब तक ही यह विस्तार प्रभावी रहेगा।
BBMB में पहले से ही दो महत्वपूर्ण पूर्णकालिक पद—सदस्य (सिंचाई) और सदस्य (पावर) लंबे समय से खाली हैं। शीर्ष पदों पर लगातार अस्थायी व्यवस्था को लेकर बोर्ड के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी आदेश के मुताबिक, मनोज त्रिपाठी का कार्यकाल 27 सितंबर से बढ़ाकर 27 दिसंबर तक किया गया है।
करीब 4 साल से खाली हैं दोनों पद
BBMB में सदस्य (सिंचाई) का पद 9 सितंबर 2020 से खाली है। इस पद पर तैनात हरियाणा के अधिकारी को उनके मूल कैडर में वापस भेजे जाने के बाद यह पद रिक्त हुआ था।
वहीं सदस्य (पावर) का पद 26 सितंबर 2022 से खाली है। फिलहाल BBMB के चीफ इंजीनियर (जनरेशन) को इस पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (PSEB) इंजीनियर्स एसोसिएशन ने केंद्र से दोनों पदों पर नियमित नियुक्तियां करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से पद खाली रहने से बोर्ड के कामकाज पर असर पड़ रहा है और यह BBMB के गठन के मूल ढांचे के अनुरूप नहीं है।
एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद गुप्ता के अनुसार, 1966 में BBMB के गठन से लेकर 2022 तक एक स्थापित व्यवस्था के तहत चेयरमैन की नियुक्ति केंद्र सरकार पार्टनर राज्यों के बाहर से करती थी, जबकि सदस्य (पावर) सामान्यतः पंजाब और सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से होता था।
2022 की अधिसूचना के बाद अटका मामला
इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर विवाद का एक कारण केंद्र की 23 फरवरी 2022 की अधिसूचना भी बताई जा रही है। इसके तहत सदस्य (पावर) और सदस्य (सिंचाई) के पदों के लिए पूरे देश के इंजीनियरों को पात्र बनाया गया, जबकि पहले इन पदों को पंजाब और हरियाणा कैडर तक सीमित माना जाता था।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा दोनों ने इस बदलाव का विरोध किया, जिसके बाद इन पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो सकीं।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक पदमजीत सिंह ने मांग की है कि 2022 की अधिसूचना को फिलहाल स्थगित रखा जाए और दोनों पदों पर जल्द स्थायी नियुक्तियां की जाएं। उनका कहना है कि अस्थायी व्यवस्था BBMB के कामकाज और उससे जुड़े विवादों को प्रभावित कर सकती है।
BBMB में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी विवादों में
विवाद के बीच केंद्र सरकार ने BBMB में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है।
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 79(2)(a) में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत BBMB में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर चार करने की बात है।
प्रस्ताव के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से एक-एक सदस्य नियुक्त किया जा सकता है।
हालांकि, पंजाब ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। पंजाब का तर्क है कि BBMB का गठन पंजाब पुनर्गठन के बाद मुख्य रूप से उत्तराधिकारी राज्यों के अधिकारों और देनदारियों से जुड़े मामलों के प्रबंधन के लिए हुआ था।
पंजाब का कहना है कि राजस्थान इस कानून के तहत उत्तराधिकारी राज्य नहीं है, जबकि राजस्थान और हिमाचल प्रदेश पहले से ही BBMB की बैठकों में पदेन सदस्यों के रूप में हिस्सा लेते हैं।
राज्य ने यह सवाल भी उठाया है कि जब BBMB की मुख्य जिम्मेदारियां सिंचाई और बिजली से जुड़ी हैं, तो अतिरिक्त पूर्णकालिक सदस्यों की जरूरत क्यों है।
इसके साथ ही पंजाब ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 78 और 79 की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। राज्य के अनुसार, इन प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में पहले से चुनौती दी गई है।



















