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24 अक्टूबर के बाद आसमान में नहीं दिखेगी दिल्ली-कुल्लू फ्लाइट! क्या है मामला?

कुल्लू । राजवीर दीक्षित

(Delhi-Kullu flights will no longer be seen in the sky after October 24! What is the matter?) भंतर स्थित कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट से दिल्ली के बीच सीधी हवाई सेवा पर बड़ा ब्रेक लगने जा रहा है। इस रूट पर उड़ान संचालित करने वाली एकमात्र एयरलाइन एलायंस एयर ने 24 अक्टूबर के बाद दिल्ली और कुल्लू के बीच अपनी सीधी उड़ानें बंद करने का फैसला किया है। इस फैसले से कुल्लू-मनाली के पर्यटन और ट्रैवल कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि एलायंस एयर इस रूट पर हफ्ते में पांच दिन उड़ानें संचालित कर रही थी। एविएशन सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, कुल्लू-दिल्ली की सीधी उड़ानों को इस तरह रोके जाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब कुल्लू दशहरा और सर्दियों का पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि कुल्लू दशहरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पहचान रखने वाला बड़ा आयोजन है। 21 से 27 अक्टूबर तक होने वाले कुल्लू दशहरे में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद रहती है और ठीक इसी दौरान हवाई कनेक्टिविटी में बदलाव किया जा रहा है।27 मार्च 2027 तक जारी शेड्यूल के अनुसार, 27 अक्टूबर के बाद कुल्लू से जयपुर और देहरादून के लिए उड़ानें जारी रहेंगी। इसका सीधा मतलब है कि दिल्ली और कुल्लू के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब सीधी फ्लाइट के बजाय कनेक्टिंग फ्लाइट का विकल्प चुनना होगा। नए शेड्यूल में जयपुर-कुल्लू उड़ानें गुरुवार और शनिवार को संचालित होंगी, जबकि देहरादून-कुल्लू उड़ानें मंगलवार और गुरुवार को चलेंगी। दोनों रूटों पर किराया करीब 4 हजार रुपये बताया जा रहा है।
अगर दिल्ली से कुल्लू पहुंचने के लिए देहरादून का रास्ता चुना जाता है तो यात्रा का खर्च लगभग 5 हजार रुपये पड़ सकता है, जबकि कुल्लू से देहरादून होते हुए दिल्ली लौटने पर करीब 7 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं। वहीं जयपुर के रास्ते दिल्ली से कुल्लू की यात्रा लगभग 7,500 रुपये और कुल्लू से दिल्ली की वापसी करीब 9 हजार रुपये पड़ सकती है।
यानी कुछ मामलों में यात्रियों को किराए के स्तर पर राहत मिल सकती है, क्योंकि ये कीमतें पहले की सीधी उड़ानों के 20 हजार रुपये से ज्यादा के किराए की तुलना में काफी कम हैं। लेकिन सवाल सिर्फ किराए का नहीं, बल्कि सीधी कनेक्टिविटी, समय और सुविधा का भी है।
पहले जहां यात्रियों के पास हफ्ते में पांच दिन दिल्ली-कुल्लू के बीच सीधी उड़ान का विकल्प था, वहीं अब उन्हें सीमित दिनों में उपलब्ध कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर निर्भर रहना होगा। सीधी उड़ान बंद होने का मतलब है कि यात्रा का समय बढ़ सकता है, कनेक्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है और यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से कहीं ज्यादा सावधानी के साथ बनानी होगी।इस बदलाव से कुल्लू-मनाली की टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगने की आशंका जताई जा रही है। पर्यटन कारोबारियों को डर है कि जिन पर्यटकों के पास कम समय है या जो सीधे दिल्ली से कुल्लू पहुंचना चाहते हैं, उनमें से कुछ लोग कनेक्टिंग फ्लाइट की परेशानी के कारण अपनी यात्रा टाल सकते हैं या किसी दूसरे पर्यटन स्थल का रुख कर सकते हैं।
कुल्लू की एयर कनेक्टिविटी को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मई से अमृतसर के लिए हफ्ते में एक बार चलने वाली फ्लाइट भी बंद हो चुकी है। ऐसे में एक के बाद एक हवाई सेवाओं के बंद होने से कुल्लू-मनाली के एयर कनेक्शन पर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, स्थानीय स्तर पर उम्मीद थी कि एलायंस एयर हिसार और जम्मू से भी कुल्लू के लिए नई उड़ान सेवाएं शुरू करेगी। लेकिन नई सेवाएं शुरू होने के बजाय एयरलाइन ने इस एयरपोर्ट से अपनी मुख्य सेवाओं में ही कटौती कर दी है। इससे पर्यटन कारोबारियों की उम्मीदों को भी झटका लगा है।
सबसे बड़ी परेशानी विंटर शेड्यूल को लेकर भी सामने आई है। विंटर शेड्यूल जारी होने में देरी के कारण यात्रियों को त्योहारों और सर्दियों के पर्यटन सीजन के दौरान अपनी यात्रा की योजना बनाने में मुश्किल हो रही है। पर्यटक पहले से टिकट, होटल और स्थानीय परिवहन की बुकिंग करना चाहते हैं, लेकिन उड़ानों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से पूरा ट्रैवल प्लान प्रभावित हो सकता है।
और यह पूरी स्थिति ऐसे वक्त में सामने आई है जब 21 से 27 अक्टूबर तक विश्व प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा आयोजित होने जा रहा है। एक तरफ कुल्लू दशहरे के लिए देश-विदेश से पर्यटकों के आने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ 24 अक्टूबर के बाद दिल्ली-कुल्लू की सीधी उड़ान बंद होने जा रही है। यानी त्योहार के बीच ही दिल्ली से कुल्लू की सीधी हवाई कनेक्टिविटी पर ब्रेक लग जाएगा।
स्थानीय पर्यटन प्रतिनिधियों ने इस स्थिति पर गहरी निराशा जताई है। उनका कहना है कि एलायंस एयर पहले कुल्लू और नई दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान संचालित करती थी। रोजाना की सेवा बंद होने के बाद कुल्लू की हवाई कनेक्टिविटी में भारी गिरावट आई है।
कुल्लू ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक भूपिंदर ठाकुर ने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुल्लू में हजारों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर पर्यटन पर निर्भर है। इनमें सिर्फ होटल और ट्रैवल एजेंसियां ही नहीं, बल्कि टूर ऑपरेटर, टैक्सी ड्राइवर, गाइड, दुकानदार, रेस्टोरेंट संचालक और पर्यटन से जुड़े कई अन्य लोग शामिल हैं।
यानी अगर पर्यटकों की संख्या में कमी आती है तो इसका असर सिर्फ एयरपोर्ट पर नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय पर्यटन इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।
बार-बार सामने आ रही हवाई सेवा की इन रुकावटों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि दूर-दराज और पर्यटन पर निर्भर क्षेत्रों के लिए एयरलाइंस की लंबी अवधि की बेहतर योजना और लगातार समन्वय कितना जरूरी है। पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि लंबे समय से कुल्लू के लिए बेहतर और भरोसेमंद हवाई कनेक्टिविटी की मांग करते रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर कुल्लू-मनाली जैसे पर्यटन केंद्र को देश के प्रमुख शहरों से मजबूत हवाई संपर्क देना है, तो सरकार की तरफ से भी प्रभावी हस्तक्षेप और एयरलाइंस के साथ बेहतर समन्वय की जरूरत है।
कुल्लू-मनाली में पर्यटन सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है। यह हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। होटल से लेकर टैक्सी और ट्रैवल एजेंसी से लेकर स्थानीय दुकानों तक, बड़ी संख्या में लोगों की कमाई पर्यटकों की आवाजाही से जुड़ी है।
ऐसे में भरोसेमंद और लगातार हवाई कनेक्टिविटी इस पूरे पर्यटन तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली जैसे बड़े शहर से सीधी उड़ान बंद होने के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले समय में कुल्लू-मनाली को नई हवाई सेवाएं मिलती हैं या फिर पर्यटकों को सीमित उड़ानों और कनेक्टिंग रूट्स पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, किराया कम होने से यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन सीधी उड़ान का खत्म होना और फ्लाइट्स की संख्या में कमी कुल्लू-मनाली के पर्यटन कारोबार के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है—वह भी ऐसे समय में जब दशहरा और विंटर टूरिज्म सीजन दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।

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