पालमपुर । राजवीर दीक्षित
(Four-lane road incomplete, toll expensive! Commuters deeply resentful) कांगड़ा से करीब 7 किलोमीटर दूर बन रहे माटौर-शिमला फोर-लेन हाईवे पर टोल चार्ज में भारी बढ़ोतरी को लेकर स्थानीय लोगों, टैक्सी ऑपरेटरों और पंचायत प्रतिनिधियों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। हल्के वाहनों के लिए टोल शुल्क 25 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये कर दिया गया है, जबकि कमर्शियल वाहनों के लिए भी टोल की दरों में काफी इजाफा किया गया है।
बढ़े हुए टोल के विरोध में गुरुवार को रानीताल के पास घाटा टोल प्लाजा पर पंचायत प्रतिनिधि, टैक्सी ऑपरेटर और स्थानीय लोग इकट्ठा हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस फोरलेन के कई महत्वपूर्ण हिस्से अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, उसके लिए वाहन चालकों से बढ़ा हुआ टोल क्यों वसूला जा रहा है।
लोगों ने कहा कि हाईवे पर अभी भी कई जगह निर्माण कार्य चल रहा है। सुरंग, पुल और सर्विस रोड जैसे जरूरी हिस्से अधूरे हैं, जबकि कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन और निर्माण कार्य से जुड़ी पाबंदियां भी लागू हैं। ऐसे में वाहन चालकों को पहले ही सफर के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और अब बढ़ा हुआ टोल उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि टोल वसूली को हाईवे पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के पूरा होने और लोगों को वादे के मुताबिक सुविधाएं मिलने से जोड़ा जाना चाहिए।
वहीं टैक्सी ऑपरेटरों ने कहा कि टोल में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर उनकी रोजाना की कमाई पर पड़ेगा। पहले से ही ईंधन, वाहन के रखरखाव और दूसरे खर्चों का बोझ है। ऐसे में टोल बढ़ने से गाड़ी चलाने की लागत और बढ़ जाएगी और आखिरकार इसका असर यात्रियों से लिए जाने वाले किराए पर भी पड़ सकता है।
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी सवाल उठाया कि जब हाईवे पर कई जगह अभी काम चल रहा है और ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा रहा है, तो बढ़ा हुआ शुल्क वसूलने का औचित्य क्या है।
विरोध के दौरान मौके पर कांगड़ा की SDM अंजलि गर्ग भी पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की और भरोसा दिलाया कि वह शिमला में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाएंगी।
हालांकि, NHAI के एक जूनियर अधिकारी ने बताया कि बदली हुई टोल दरें लागू नोटिफिकेशन और टोल पॉलिसी के अनुसार लागू की गई हैं।
यह मामला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि टोल वसूली को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। ऐसे में टोल दरों में हुई इस बढ़ोतरी ने स्थानीय लोगों की चिंता और विरोध दोनों को बढ़ा दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो लोग रोजाना इस हाईवे से आते-जाते हैं या इसी सड़क पर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, उनके लिए बढ़ा हुआ टोल सीधा आर्थिक बोझ बन जाएगा।
अब बड़ा सवाल यही है—जब फोरलेन के कई अहम हिस्से अभी अधूरे हैं, तो क्या वाहन चालकों से बढ़ी हुई टोल दर वसूलना उचित है?


















