Home Political यूपी में BJP का बड़ा दांव: 8 नए राज्यसभा चेहरे, पुरी-वर्मा का...

यूपी में BJP का बड़ा दांव: 8 नए राज्यसभा चेहरे, पुरी-वर्मा का पत्ता साफ!

लखनऊ। राजवीर दीक्षित 

(BJP’s big move in UP: 8 new faces for Rajya Sabha; Puri and Verma dropped!) उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने बड़ा सियासी दांव खेलते हुए सोमवार को अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। खास बात यह है कि सभी चेहरे नए हैं। सूची में 2 महिलाएं शामिल हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नहीं मिला है। इससे मोदी मंत्रिमंडल में भी बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।

भाजपा की सूची में 2 ब्राह्मण, 1 ठाकुर, 3 पिछड़ा वर्ग और 2 दलित चेहरे शामिल हैं। पिछड़े वर्ग से लोधी, कुर्मी और पाल समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि दलित वर्ग में खटीक और पासी समाज को जगह मिली है।

पिछड़ा कार्ड के साथ ब्राह्मणों पर भी फोकस

भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। धर्मपाल सिंह लोधी, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार के जरिए लोधी, पाल और कुर्मी वोट बैंक पर फोकस किया गया है।

दलित वर्ग से विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत को मैदान में उतारा गया है। वहीं ठाकुर समाज से राम प्रताप सिंह चौहान को टिकट मिला है।

ब्राह्मण चेहरे के तौर पर राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय को मौका दिया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा UGC के नए नियमों को लेकर अगड़े वर्ग में पैदा हुई नाराजगी और ब्राह्मण समाज की शिकायतों को भी साधना चाहती है।

ठाकुरों का प्रतिनिधित्व घटा

भाजपा ने इस बार ठाकुर समाज के मौजूदा राज्यसभा चेहरों नीरज शेखर और अरुण सिंह को टिकट नहीं दिया है। उनकी जगह ठाकुर समाज से सिर्फ राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का टिकट कटा

राज्यसभा की नई सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं है। दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है।

ऐसे में मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि पुरी के लिए भविष्य में किसी अन्य राज्य की खाली होने वाली राज्यसभा सीट से वापसी की संभावना बनी रह सकती है।

पुरी 2018 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे थे, जबकि बीएल वर्मा को 2020 में राज्यसभा भेजा गया था।

बाराबंकी की BJP में बढ़ी ताकत

राज्यसभा टिकटों के ऐलान के साथ बाराबंकी का सियासी कद भी बढ़ता नजर आ रहा है। भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका रावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है।

बाराबंकी से प्रदेश महामंत्री उपेंद्र रावत, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैद्यनाथ रावत, राज्यमंत्री सतीश शर्मा और प्रदेश मंत्री अवधेश श्रीवास्तव भी जुड़े हैं। ऐसे में भाजपा संगठन और सरकार में बाराबंकी की मौजूदगी मजबूत हुई है।

16 अक्टूबर को चुनाव, 6 को नामांकन की आखिरी तारीख

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं। इनमें से 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।

सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

अगर भाजपा 9वां और सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारती है तो भाजपा के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।

चुनाव हुआ तो 37 वोट का खेल

यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं, लेकिन 7 सीटें खाली होने के कारण फिलहाल 396 विधायक हैं। 10 राज्यसभा सीटों के लिए एक उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के करीब 37 वोट की जरूरत होगी।

भाजपा के पास 8 उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है, जबकि सपा के दो उम्मीदवार भी आसानी से जीत सकते हैं। लेकिन सपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा तो पूरा चुनावी गणित बदल जाएगा।

सपा के पास करीब 100 विधायक हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं भाजपा के लिए भी आठवें उम्मीदवार को बचाने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी हो सकता है।

क्रॉस वोटिंग का खतरा सबसे बड़ा

अगर मुकाबला हुआ तो प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता के वोट निर्णायक बन जाएंगे। विधायकों को वोटिंग से पहले प्रशिक्षण भी दिया जाता है कि किस उम्मीदवार को किस वरीयता पर वोट देना है।

ऐसे में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और सियासी जोड़-तोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सपा के दोनों उम्मीदवारों का भी दमदार कनेक्शन

सपा के उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उन्हें उद्योगपति मुकेश अंबानी के करीबी के तौर पर जाना जाता है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

वहीं प्रो. राम गोपाल यादव सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चाचा हैं और लंबे समय से पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हैं। वह कई बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में सपा के प्रमुख महासचिव हैं।

अब असली खेल 6 अक्टूबर के बाद शुरू होगा—निर्विरोध चुनाव या फिर यूपी में राज्यसभा का बड़ा सियासी संग्राम!

Translate »
error: Content is protected !!