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जैस्मीन सैंडलस का मोहाली शो विवादों में, हथियारों और शराब के गानों पर रोक लगाने की उठी मांग

जैस्मीन सैंडलस का मोहाली शो विवादों में, हथियारों और शराब के गानों पर रोक लगाने की उठी मांग

टारगेट न्यूज़: पंजाबी पॉप संगीत जगत की मशहूर गायिका जैस्मीन सैंडलस का आगामी 10 अक्टूबर को मोहाली में होने वाला लाइव कॉन्सर्ट कानूनी और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। मोहाली के सीपी-67 मॉल स्थित आउटसाइड एरिना में आयोजित होने वाले इस ‘ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ कार्यक्रम को लेकर शहर में माहौल गरमा गया है। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और प्रोफेसर पंडित राव धरेन्नवर ने मोहाली पुलिस को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने सख्त मांग की है कि शो के दौरान किसी भी ऐसे गीत का प्रदर्शन न किया जाए जो खुले तौर पर हथियारों, हिंसा, शराब, अफीम या अन्य नशीले पदार्थों का महिमामंडन करता हो। इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • प्रसिद्ध पंजाबी गायिका जैस्मीन सैंडलस का ‘ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ 10 अक्टूबर को मोहाली के सीपी-67 मॉल में प्रस्तावित है।
  • सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. पंडित राव धरेन्नवर ने मोहाली पुलिस को पत्र लिखकर हथियारों और शराब के गानों पर रोक की मांग की है।
  • डीएसपी सिटी-2 हरसिमरन सिंह बल ने स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
  • जैस्मीन सैंडलस के कई लोकप्रिय गीतों जैसे ‘इलीगल वेपन’, ‘बंब जट्ट’, ‘व्हिस्की दी बोतल’ और ‘नशा’ में हथियारों और शराब के संदर्भ रहे हैं।
  • इससे पहले भी मार्च महीने में करण औजला के मोहाली शो के दौरान इसी तरह के हस्तक्षेप के बाद नियमों का कड़ाई से पालन कराया गया था।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

विवाद की मुख्य वजह गायिका जैस्मीन सैंडलस के वे लोकप्रिय और चार्टबस्टर ट्रैक हैं, जिन्होंने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई है। उनके कई गानों में हथियारों के इस्तेमाल, बंदूक संस्कृति और शराब के सेवन को खुलकर दिखाया गया है। ‘इलीगल वेपन’ और ‘बंब जट्ट’ जैसे उनके गानों में गन कल्चर का सीधा प्रभाव देखने को मिलता है, वहीं ‘व्हिस्की दी बोतल’ और ‘सिप सिप’ जैसे गानों में शराब और नशे के संदर्भ प्रमुखता से शामिल हैं। ‘सिप सिप’ गाने की पंक्ति ‘मेरे नैन ने शराब दिया दो बोतला’ का हवाला देते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इस तरह के गीतों का युवा पीढ़ी के मानस पर बेहद नकारात्मक और घातक असर पड़ता है। मोहाली पुलिस प्रशासन को जैसे ही यह पत्र प्राप्त हुआ, हरकत में आए अधिकारियों ने आयोजकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सिटी-2 हरसिमरन सिंह बल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस संबंध में शुक्रवार को औपचारिक पत्र मिल चुका है। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि जिले के भीतर पंजाब सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट और एंटी-ड्रग कैंपेन ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ की भावना के खिलाफ कोई भी गतिविधि न हो। यदि कॉन्सर्ट के दौरान किसी भी प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री का मंचन किया जाता है, तो कानूनन सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए आयोजकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अश्लील भाषा, हिंसा या नशे को बढ़ावा देने वाली प्रस्तुति न दी जाए।

यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रोफेसर पंडित राव धरेन्नवर ने इस तरह के आयोजनों के खिलाफ आवाज उठाई हो। इससे पहले इसी साल 14 मार्च को उन्होंने मोहाली के पीसीए स्टेडियम में हुए लोकप्रिय गायक करण औजला के शो को लेकर भी पंजाब राज्य महिला आयोग और पुलिस का दरवाजा खटखटाया था। उनकी उस पहल के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया था और आयोजकों को स्पष्ट कर दिया था कि कॉन्सर्ट के दौरान किसी भी तरह की अशिष्टता, भद्दे इशारे और आपत्तिजनक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि कलाकारों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में सकारात्मक संदेश दें, न कि युवाओं को अपराध और नशे की तरफ धकेलें।

स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लाइव कॉन्सर्ट के दौरान पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने वाले हथियारों तथा शराब के महिमामंडन को पूरी तरह से रोका जाए। – प्रो. पंडित राव धरेन्नवर, सामाजिक कार्यकर्ता

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से पंजाबी संगीत उद्योग में व्याप्त गन कल्चर और शराब के महिमामंडन पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। मनोरंजन जगत और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच की यह खींचतान आने वाले दिनों में पंजाब के अन्य संगीत कार्यक्रमों के लिए भी एक कड़ा नियम तय कर सकती है। यदि मोहाली प्रशासन इस शो के दौरान नियमों का सख्ती से पालन कराने में कामयाब रहता है, तो यह राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक कड़ा मिसाल बनेगा। कलाकारों और उनके प्रबंधकों को अब भविष्य में अपने शोज़ की रूपरेखा तैयार करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि वे स्थानीय कानूनों और सामाजिक मर्यादाओं का पूर्ण सम्मान करें। अंततः, यह देखना दिलचस्प होगा कि 10 अक्टूबर को होने वाले इस हाई-प्रोफाइल शो में गायिका और उनके आयोजक प्रशासन के इन कड़े निर्देशों का पालन किस हद तक कर पाते हैं।

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