नंगल । राजवीर दीक्षित
पंजाब के नंगल में आम आदमी पार्टी (AAP) और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। जिला संयोजक संजीव गौतम के नेतृत्व में AAP कार्यकर्ताओं ने पिछले सप्ताह बोर्ड अधिकारियों द्वारा तोड़े गए एक मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से का दोबारा निर्माण शुरू करवाने में मदद की। इस घटनाक्रम ने नंगल में जमीन पर BBMB के अधिकार क्षेत्र और बोर्ड के प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती को लेकर चल रहे विवाद को और तेज कर दिया है।
BBMB की ओर से नंगल शहर में अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर की जा रही कार्रवाई और नागरिक क्षेत्रों में CISF की मौजूदगी पर पंजाब के राजनीतिक नेतृत्व ने सवाल उठाए हैं। राज्य के नेताओं का कहना है कि केंद्रीय बल की तैनाती और उसकी भूमिका निर्धारित दायरे तक ही सीमित रहनी चाहिए।
पिछले सप्ताह BBMB के अधिकारी CISF के जवानों के साथ नंगल के किलन क्षेत्र में पहुंचे थे। यहां एक निजी मकान के हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया था। बोर्ड का दावा था कि मकान का हाल ही में बनाया गया हिस्सा उसकी जमीन पर अवैध कब्जा करके खड़ा किया गया था। बताया जा रहा है कि नंगल शहर में कथित तौर पर अनधिकृत निर्माण के किसी हिस्से को गिराने के लिए BBMB ने पहली बार सीधे जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया।
सोमवार को जब BBMB अधिकारी ध्वस्त किए गए हिस्से का दोबारा निर्माण रुकवाने के लिए मौके पर पहुंचे, तो AAP कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया। जिला संयोजक संजीव गौतम ने दावा किया कि संबंधित क्षेत्र BBMB के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि यह नंगल नगर परिषद की सीमा के अंतर्गत है।
दूसरी ओर, BBMB का कहना है कि मकान के हिस्से को गिराने की कार्रवाई उसकी जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के अभियान का हिस्सा थी। इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बोर्ड की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई चुनिंदा तरीके से और कुछ लोगों को निशाना बनाकर की जा रही है।
इस विवाद पर पंजाब के शिक्षा एवं स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्य के नागरिक क्षेत्रों में CISF के इस्तेमाल और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
बैंस का कहना है कि CISF का अधिकार क्षेत्र BBMB के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तक सीमित है। नागरिक क्षेत्रों में पंजाब पुलिस को प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करना केंद्रीय बल के कार्यक्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि CISF को भाखड़ा बांध की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था और उसे अपनी जिम्मेदारी तक ही सीमित रहना चाहिए।
बैंस ने कहा था कि यदि BBMB अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाना चाहता है, तो उसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि CISF के जवान दोबारा पंजाब में नागरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं, तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
नंगल की ताजा घटना ने BBMB के प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती को लेकर पंजाब सरकार और बोर्ड के बीच पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। पंजाब सरकार ने वर्ष 2021 में शुरुआत में CISF की तैनाती पर सहमति दी थी, लेकिन बाद में मौजूदा राज्य सरकार ने 4 जुलाई को आयोजित BBMB की पूर्ण बैठक में अपनी सहमति वापस ले ली थी।
पंजाब की सहमति वापस लिए जाने के बावजूद BBMB ने 25 जुलाई 2025 को CISF की तैनाती के खर्च के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास 8.5 करोड़ रुपये जमा करवाए थे। इसके बाद अगस्त 2025 में BBMB के प्रतिष्ठानों पर CISF को तैनात किया गया था।
BBMB का तर्क है कि उसके महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए समर्पित केंद्रीय सुरक्षा बल आवश्यक है। वहीं, पंजाब सरकार ने नागरिक मामलों में केंद्रीय बल की भूमिका पर आपत्ति जताई है, खासकर अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई को लेकर।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि BBMB ने संकेत दिया है कि भविष्य में CISF की तैनाती भाखड़ा बांध से आगे बढ़ाकर नंगल बांध समेत अन्य प्रतिष्ठानों तक भी की जा सकती है।
नंगल में AAP कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़े गए मकान के हिस्से का दोबारा निर्माण शुरू करवाने और राज्य सरकार की ओर से CISF जवानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बीच यह घटना पंजाब और BBMB के बीच जमीन, अधिकार क्षेत्र तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में एक नया मोर्चा खोलती नजर आ रही है।


















