(Owaisi slams Bihar’s NPR move; demands SC review the decision) बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। AIMIM प्रमुख ने 27 मई, 2026 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की है, जिसमें अदालत ने बिहार में SIR कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा था। ओवैसी की याचिका में आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची में संशोधन के दौरान अपनाए गए कानूनी सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए गए हैं।
आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
ओवैसी ने अपनी समीक्षा याचिका में कुछ नए तथ्यों और कथित अनियमितताओं का हवाला दिया है। याचिका के अनुसार, चुनाव आयोग के कुछ फैसले और आधिकारिक पत्र कथित तौर पर सभी चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए गए। इसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के संदर्भ में उठाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि इन खुलासों से यह सवाल पैदा होता है कि SIR के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं और मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए निर्धारित प्रावधानों का पर्याप्त पालन हुआ या नहीं।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का हवाला
ओवैसी ने द इंडियन एक्सप्रेस में 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के नाम से जारी कुछ फैसलों और संचार पर कथित तौर पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
याचिका में फॉर्म-6 में बदलाव, आधिकारिक पत्र जारी करने, मतदाता सूची के डेटाबेस के प्रबंधन और मतदाताओं के नाम बहाल करने वाले आदेशों के खिलाफ आयोग की ओर से अपील दायर किए जाने जैसे मुद्दों का उल्लेख है। ओवैसी का तर्क है कि इन मामलों की समीक्षा SIR की प्रक्रिया की वैधता के लिहाज से जरूरी है।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी उठाया
समीक्षा याचिका में गोवा के एक मामले का भी जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि मतदाता सूची में शामिल किए जाने के योग्य पाए गए 97 लोगों के नाम अंतिम सूची में वापस नहीं जुड़ सके, क्योंकि संबंधित सॉफ्टवेयर में नाम बहाल करने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
याचिका में कहा गया है कि ऐसे मामले मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, कारण दर्ज करने की व्यवस्था और मनमाने तरीके से नाम हटाए जाने से बचाने वाले सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
27 मई, 2026 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बिहार में SIR कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा था। अदालत ने इस प्रक्रिया को निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ा बताया था।
ओवैसी मूल याचिका की कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे। इसलिए उन्होंने समीक्षा याचिका दाखिल करने की अनुमति भी मांगी है। उन्होंने मतदाता, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका का हवाला दिया है।
अब समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम होगा। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप और कथित अनियमितताएं न्यायिक जांच के विषय हैं; अदालत ने समीक्षा की मांग पर क्या निर्णय लिया है, यह आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होगा।


















