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रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिजनों को मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट का विदेश मंत्रालय को सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश

रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिजनों को मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट का विदेश मंत्रालय को सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश

टारगेट न्यूज़: सर्वोच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों की सहायता और मुआवजे के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि पीड़ित परिवारों के पास मुआवजे की मांग करने का कानूनी अधिकार है और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे तौर पर मानवीय संवेदनाओं और नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को इसमें किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतनी चाहिए। इस उच्च स्तरीय मामले की सुनवाई एक विशेष पीठ द्वारा की जा रही है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिजनों के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने को कहा।
  • विदेश मंत्रालय की नवीनतम स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध में कुल 51 भारतीयों की मौत हुई है और 77 अभी भी लापता हैं।
  • अब तक रूसी सरकार द्वारा छह परिवारों के मुआवजे के दावों को प्रोसेस किया गया है, जिनमें से पांच का पूरा भुगतान और एक का आंशिक भुगतान हुआ है।
  • राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) को पीड़ित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
  • कोर्ट ने डीएनए टेस्ट, कागजी कार्रवाई और दावों को जमा करने में परिवारों की मदद करने के निर्देश दिए हैं।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय की तरफ से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को अद्यतन स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लगभग 267 भारतीयों ने रूसी सशस्त्र बलों में दाखिला लिया था। इनमें से 51 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 139 लोगों को सैन्य सेवा से कार्यमुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, भारतीय दूतावास अभी भी 77 ऐसे रंगरूटों की तलाश कर रहा है, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। रूसी अधिकारियों ने इनमें से सात लोगों के लापता होने की आधिकारिक पुष्टि की है। अदालत ने इस बात पर कड़ी चिंता व्यक्त की कि इतने बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिक इस संघर्ष क्षेत्र में फंसे और उनमें से कई अपनी जान गंवा बैठे।

अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि रूस सरकार से मुआवजा प्राप्त करने में कई प्रकार की व्यावहारिक बाधाएं आ रही हैं, जिनमें डीएनए आधारित पहचान में देरी और पार्थिव शरीर को भारत वापस लाना शामिल है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इन सभी मामलों में कूटनीतिक और कांसुलर स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रूसी अधिकारियों का रुख भी सहयोगपूर्ण रहा है और इस पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए लगातार अनुरोध किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, अदालत ने एक अन्य मामले में सिकंदर सिंह नामक व्यक्ति की सजा और उसे भारत की जेल में स्थानांतरित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया, जिसे रूस की एक अदालत ने छेड़छाड़ के मामले में आठ साल की सजा सुनाई है।

मुआवजा मांगने का अधिकार उन सभी 51 व्यक्तियों के परिवारों का है जिन्होंने वहां अपनी जान गंवाई है। हमारे राजनयिक और कांसुलर प्रयास परिवारों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और हम इस प्रक्रिया को और सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। – सर्वोच्च न्यायालय और विधि अधिकारी

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

इस पूरे प्रकरण ने उन ट्रेवल एजेंटों और फर्जी रिक्रूटमेंट रैकेट के काले कारोबार को भी बेनकाब किया है, जिन्होंने रोजगार के झूठे वादों के तहत युवाओं को रूस भेजा और उनके पासपोर्ट तथा दस्तावेज जब्त कर उन्हें सीधे युद्ध के मोर्चे पर झोंक दिया। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश उन पीड़ित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा जो न केवल अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं के कारण मुआवजे से भी वंचित थे। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने और विदेश जाने वाले युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और न्यायपालिका के स्तर पर एक मजबूत और पारदर्शी कार्यप्रणाली विकसित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि कोई भी एजेंट मासूम नागरिकों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ न कर सके।

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