Home Chandigarh लोग पागल कहते हैं, फिर भी नहीं रुके ‘झाड़ू योद्धा’!

लोग पागल कहते हैं, फिर भी नहीं रुके ‘झाड़ू योद्धा’!

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित 

 

(People call them crazy, yet the ‘broom warriors’ haven’t stopped!) लोग मजाक उड़ाएं या पागल कहें, लेकिन दूसरों की परवाह किए बिना शहर को साफ रखने का जुनून चंडीगढ़ के ‘झाड़ू योद्धा’ इंदरजीत सिंह सिद्धू के सिर चढ़कर बोलता है। पंजाब पुलिस के सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और पद्मश्री सम्मानित सिद्धू मंगलवार सुबह सेक्टर-49 की सड़कों पर कचरा उठाते नजर आए। उनका मानना है कि स्वच्छता सिर्फ सरकार या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

पद्मश्री मिला, लेकिन नहीं बदला अंदाज

इंदरजीत सिंह सिद्धू को इसी साल जून में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके बावजूद उनकी दिनचर्या पहले जैसी ही है। मंगलवार सुबह करीब 6:10 बजे उन्होंने सफाई अभियान शुरू किया और डेढ़ घंटे से अधिक समय तक सार्वजनिक स्थानों की सफाई की।

सिद्धू केवल कचरा उठाते ही नहीं, बल्कि उसे अलग-अलग भी करते हैं। कमजोर स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने सड़क पर पड़ी पेड़ों की टहनियां हाथों से हटाईं और उन्हें ऐसी जगह रखा, जहां से नगर निगम के कर्मचारी उन्हें ले जा सकें।

मजाक उड़ाने वालों को काम से देंगे जवाब

सिद्धू ने बताया कि सफाई करते समय कुछ लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जबकि कुछ ने उनका मजाक उड़ाते हुए पागल तक कहा। लेकिन ऐसी टिप्पणियां उनके इरादे को कमजोर नहीं कर सकीं। उनका कहना है कि वह आखिरी सांस तक सफाई का काम जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि विदेशों की स्वच्छता देखकर अपने शहरों की स्थिति से तुलना करनी चाहिए। शहर को साफ रखना केवल प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

कचरा फैलाने वालों से भिड़ना नहीं, सोच बदलना मकसद

सिद्धू के मुताबिक, उन्हें पता है कि उनके इलाके में कौन लोग कचरा फैलाते हैं, लेकिन वह उनसे झगड़ा करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी निभाना बेहतर समझते हैं। उन्हें उम्मीद है कि रोजाना उन्हें सफाई करते देखकर लोग अपनी गलतियों को समझेंगे और अपनी आदतों में बदलाव लाएंगे।

उनके पड़ोसी सरजीत सिंह ने भी उनके काम पर गर्व जताया। सिद्धू ने पहले अपने आवासीय इलाके में फैली गंदगी को लेकर नगर निगम से शिकायत की थी, लेकिन जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने खुद झाड़ू उठाने का फैसला किया।

बॉक्सर से DIG तक का सफर

इंदरजीत सिंह सिद्धू ने पटियाला के महिंद्रा कॉलेज से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की और कॉलेज के दिनों में बॉक्सिंग भी की। वर्ष 1963 में वह पुलिस विभाग में सीधे इंस्पेक्टर भर्ती हुए और 1981 में IPS कैडर में पदोन्नत हुए। पंजाब में आतंकवाद के दौर में वह अमृतसर के SP भी रहे। वर्ष 1996 में वह DIG के पद से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद आरामदायक जीवन चुनने के बजाय उन्होंने स्वच्छता को अपना मिशन बना लिया। आज उनका संदेश साफ है—शहर को साफ रखने के लिए सिर्फ शिकायतें नहीं, खुद पहल करने का जज्बा भी चाहिए।

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