आनंदपुर साहिब में ओवरलोडिंग और अवैध खनन सामग्री की ढुलाई पर शिकंजा, मॉडिफाइड टिप्परों पर 2.5-2.5 लाख रुपये का जुर्माना
रूपनगर । राजवीर दीक्षित
रोपड़ जिले की आनंदपुर साहिब सब-डिवीजन में पिछले 20 दिनों से पुलिस और खनन विभाग की ओर से की जा रही कार्रवाई ने कथित अवैध खनन और वहां से निकाली गई सामग्री की ढुलाई के बड़े पैमाने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस अभियान के दौरान पुलिस ने पांच FIR दर्ज की हैं, जबकि ओवरलोडिंग के मामले में 70 से अधिक वाहनों के चालान काटे गए हैं। वहीं, खनन विभाग ने चार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रत्येक पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
अधिकारियों ने निर्धारित क्षमता से अधिक खनन सामग्री ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसके अलावा, अवैध रूप से निकाली गई खनन सामग्री की ढुलाई में इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडिफाइड टिप्पर भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 70 से अधिक वाहनों के ओवरलोडिंग के चालान किए गए हैं। प्रत्येक चालान की न्यूनतम राशि 20,000 रुपये बताई गई है।
खनन विभाग ने पुलिस की मदद से बदली हुई बॉडी वाले चार टिप्परों के चालान काटे हैं और प्रत्येक पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में मॉडिफाइड टिप्परों पर लगाया गया यह सबसे बड़ा जुर्माना है।
ओवरलोडिंग से ज्यादा कमाई का आरोप
अवैध खनन सामग्री की ढुलाई में शामिल लोगों के लिए ओवरलोडिंग को अक्सर आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है। वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री ले जाना नियमों का उल्लंघन है।
आरोप है कि अवैध खनन में शामिल लोग प्रति चक्कर अधिक सामग्री ले जाने के लिए टिप्परों में ओवरलोडिंग करते हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ जाती है।
अवैध रूप से निकाली गई सामग्री कम कीमत पर खरीदी जा सकती है या आवश्यक परमिट और शुल्क का भुगतान किए बिना उसकी ढुलाई की जा सकती है। इससे इस कारोबार में शामिल लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि, ओवरलोड वाहन सड़कों और पुलों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके अलावा, GST और खनन रॉयल्टी का भुगतान नहीं होने से सरकार को राजस्व का नुकसान भी होता है।
कार्रवाई के बावजूद सिस्टम में कई खामियां
कार्रवाई तेज होने के बावजूद व्यवस्था में कई खामियां सामने आ रही हैं। अवैध खनन के कारोबार में बिना पंजीकरण के टिप्पर और एक्सकेवेटर चलने की खबरों ने वाहनों, मशीनरी, खनिजों के उत्खनन और उनकी ढुलाई की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं।
खनन के लिए एक्सकेवेटर का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि टिप्परों के जरिए सामग्री को निर्माण स्थलों और अन्य जगहों तक पहुंचाया जाता है।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि मशीनरी और वाहन उचित पंजीकरण, परमिट या मालिकाना हक के रिकॉर्ड के बिना काम करते हैं, तो उनके संचालकों की पहचान करना, जिम्मेदारी तय करना और सामग्री की सप्लाई चेन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
सूत्रों का कहना है कि केवल सड़कों पर पकड़े जाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं हो सकता। खनन स्थल, लोडिंग पॉइंट, स्टॉकयार्ड और सामग्री पहुंचाने के ठिकाने अब भी प्रभावी निगरानी से बाहर रह सकते हैं।
प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को वाहनों के पंजीकरण, खनन की अनुमति, खनिज परिवहन दस्तावेजों, वाहनों की अधिकृत भार क्षमता और ढुलाई की जा रही सामग्री के स्रोत की जांच करनी चाहिए।
20 दिनों की कार्रवाई में पांच FIR, 70 से ज्यादा चालान
रोपड़ जिले की आनंदपुर साहिब सब-डिवीजन खनन गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है। यहां 20 दिनों के भीतर पांच FIR दर्ज होना और 70 से अधिक ओवरलोड वाहनों के चालान काटा जाना कार्रवाई में तेजी को दर्शाता है।
खनन विभाग की ओर से चार वाहनों पर 2.5-2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना भी एक निवारक कदम साबित हो सकता है, बशर्ते इस तरह की कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहे।
ताजा कार्रवाई ने रोपड़ जिले में अवैध खनन के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन का यह अभियान लगातार जारी रहता है या कुछ समय बाद इसकी रफ्तार धीमी पड़ जाती है।


















