रोपड़ । राजवीर दीक्षित
रोपड़ हेडवर्क्स से महज तीन किलोमीटर नीचे सतलुज नदी के तल में खनन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। किसान संगठनों और आसपास के गांवों के निवासियों ने खनन नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
भारतीय किसान यूनियन (बहरामके) के नेतृत्व में गियासपुरा, हवेली, फूल और आसपास के अन्य गांवों के निवासियों ने गुरुवार शाम खनन गतिविधियों को रुकवा दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नदी में अवैज्ञानिक तरीके से खनन किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि खनन कार्य शुरू होने के पहले ही दिन रेत से लदे सैकड़ों टिप्पर यहां से निकाले गए।
खनन करने वालों के साथ बैठक के दौरान संबंधित पक्ष ने दावा किया कि उन्हें रोपड़ हेडवर्क्स से नीचे सतलुज नदी के तल में 33 एकड़ क्षेत्र में खनन का अधिकार मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि खनन विभाग ने तीन मीटर की गहराई तक बजरी निकालने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों के इस्तेमाल की अनुमति दी है।
हालांकि, किसान संगठनों ने खनन पट्टाधारकों से उनके अधिकारों को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज पेश करने की मांग की। उन्होंने खनन दोबारा शुरू करने से पहले पट्टे पर दिए गए क्षेत्र की निशानदेही करवाने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्थानीय निवासियों को खनन क्षेत्र की सीमाओं और दी गई अनुमतियों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रेत इकट्ठा करने के लिए नदी के तल में अस्थायी मिट्टी का बांध बनाया गया है, जिससे पानी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है। उन्होंने इस बांध को हटाने और मामले की जांच करवाने की मांग की।
पंजाब सांझिवालता दल के नेता गौरव राणा भी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन अवैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। उनका कहना था कि किसानों के विरोध और काम रुकवाने के बावजूद संबंधित विभागों का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी शिकायतें सुनने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।
भारी वाहनों की आवाजाही पर भी उठे सवाल
इस विवाद में भारी वाहनों की आवाजाही भी चर्चा का विषय बन गई है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध होने के बावजूद रेत से लदे सैकड़ों टिप्पर आईआईटी रोपड़ रोड से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खनन स्थल कथित तौर पर नवांशहर जिले के बलाचौर क्षेत्र में स्थित है, लेकिन रेत की ढुलाई रोपड़ के इलाकों से होने के कारण स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान संगठनों ने नदी के तल में कई भारी मशीनें तैनात किए जाने पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, खनन कार्य से जुड़े एक कार्यालय पर पंजाब पुलिस का स्टिकर लगे होने को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।
किसान नेताओं का आरोप है कि उन्होंने खनन विभाग और पुलिस अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया, लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
मामले को लेकर संपर्क किए जाने पर रोपड़ के डिप्टी कमिश्नर आदित्य दचलवाल ने कहा कि वह इस मामले की जांच करवाएंगे।
रोपड़ और बलाचौर के नेताओं की चुप्पी पर सवाल
किसान संगठनों ने इस मुद्दे पर रोपड़ और बलाचौर के सत्तारूढ़ दल के नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि नेता इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करें और प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों और शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


















