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रोहतांग पास पर मैगी और चाय का कारोबार! दुकानदार रोज बेचता है 70 प्लेट मैगी और 200 कप चाय, रोजाना की कमाई जानकर रह जाएंगे हैरान

रोहतांग पास पर मैगी और चाय का कारोबार! दुकानदार रोज बेचता है 70 प्लेट मैगी और 200 कप चाय, रोजाना की कमाई जानकर रह जाएंगे हैरान

द टारगेट न्यूज डेस्क

कहावत बिल्कुल सही है कि कोई भी कारोबार छोटा नहीं होता। इसका शानदार उदाहरण हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास में देखने को मिला है, जहां सड़क किनारे मैगी बेचने वाला एक दुकानदार अपनी रोजाना की बिक्री को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है।
हैरानी की बात यह है कि पर्यटन का ऑफ सीजन होने और पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद यह दुकानदार रोजाना करीब 60 से 70 प्लेट मैगी और लगभग 200 कप चाय बेच रहा है। इससे उसका अनुमानित दैनिक कारोबार 14 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच रहा है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस कमाई को देखकर हैरान हैं, तो कुछ का कहना है कि इतनी बिक्री का मतलब इतनी ही कमाई या मुनाफा नहीं है। दरअसल, इतनी ऊंचाई पर दुकान चलाने के लिए सामान की ढुलाई, खराब मौसम और शारीरिक मेहनत जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
यह मामला उस समय सामने आया जब कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान ने रोहतांग पास की अपनी यात्रा के दौरान एक मैगी विक्रेता से बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
वीडियो में चौहान बताते हैं कि उन्होंने दुकानदार से उसकी कमाई के बारे में पूछा। इस पर दुकानदार ने शुरुआत में कहा कि अभी ऑफ सीजन चल रहा है, इसलिए कारोबार थोड़ा धीमा है।
दुकानदार के मुताबिक, वह रोजाना लगभग 60 से 70 प्लेट मैगी और करीब 200 कप चाय बेचता है। इसके अलावा अंडों के भी कुछ ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन मैगी और चाय के मुकाबले उनकी मांग काफी कम रहती है।
हर्ष चौहान ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो के कैप्शन में दुकानदार की रोजाना की बिक्री का हिसाब भी साझा किया। उनके मुताबिक, मैगी की एक प्लेट 100 रुपये और चाय का एक कप 40 रुपये में बेचा जाता है।
उन्होंने गणना साझा करते हुए लिखा कि रोहतांग पास में ऑफ सीजन के दौरान भी दुकानदार रोजाना 60 से 70 प्लेट मैगी और करीब 200 कप चाय बेच रहा है। इस हिसाब से उसकी प्रतिदिन की अनुमानित बिक्री 14 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
इन आंकड़ों के आधार पर दुकानदार का रोजाना का कुल कारोबार करीब 14,000 से 15,000 रुपये बैठता है। इसमें अंडों से होने वाली अतिरिक्त कमाई शामिल नहीं है। हालांकि, यह कुल बिक्री है, वास्तविक मुनाफा नहीं। इसमें से मैगी, चाय और अन्य सामान की लागत, सप्लाई को रोहतांग तक पहुंचाने का खर्च और दुकान के रखरखाव पर होने वाला खर्च घटाना होगा।
दिलचस्प बात यह है कि ये आंकड़े पर्यटन के ऑफ सीजन के हैं, जब पहाड़ी पर्यटन स्थल पर पर्यटकों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रहती है। ऐसे में पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान इस दुकानदार का कारोबार कितना बढ़ जाता होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
हर्ष चौहान ने भी इसी बात की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर ऑफ सीजन में इतनी बिक्री हो रही है, तो पीक टूरिस्ट सीजन में होने वाले कारोबार की कल्पना कीजिए!
उन्होंने इस कहानी के जरिए एक अहम संदेश भी दिया कि किसी भी कारोबार को उसके छोटे या बड़े स्तर से नहीं आंकना चाहिए। उनका कहना था कि कोई भी बिजनेस छोटा नहीं होता, जरूरत है तो मेहनत और सही मौके को पहचानने की।

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