द टारगेट न्यूज़:
पूर्व एनडीए सहयोगियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (सद्) के बीच बहुप्रतीक्षित चुनावी गठबंधन पर अंतिम निर्णय दीपावली के आसपास आने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पिछले नौ दिनों में दूसरी बार पंजाब में एनडीए सरकार बनने की बात दोहराए जाने के बाद से इस गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। अमित शाह ने सबसे पहले 24 अक्टूबर को दिल्ली में यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर पंजाब में एनडीए सरकार का जिक्र किया था और इसके बाद कल चंडीगढ़ प्रशासन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भी उन्होंने यही बात दोहराई। चंडीगढ़ में अपने भाषण की शुरुआत में ही उनका यह उल्लेख राजनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन की संभावना के बारे में पूछे जाने पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने सकारात्मक संकेत देते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस बीच, राजनीतिक गलियारों की निगाहें मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाले एक विवाह स्वागत समारोह पर टिकी हैं। भाजपा उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल की बेटी रिया और कांग्रेस के दिग्गज नेता करण सिंह के पोते आरके मार्तंड सिंह के इस रिसेप्शन का आयोजन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी जय इंदर कौर के आवास पर किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के शीर्ष आमंत्रितों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी व बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल शामिल हैं। एक अकाली दल के नेता के अनुसार, इस समारोह में लंबे समय के बाद प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शीर्ष अकाली नेतृत्व की आमने-सामने मुलाकात होगी, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को बल मिल सकता है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों के वोट शेयर के आधार पर संभावित रूप से जीतने योग्य सीटों की एक सूची तैयार की है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यदि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो वे पंजाब में एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकते हैं। इसके विपरीत, अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में सर्वेक्षणों से पता चला है कि आम आदमी पार्टी आगे रह सकती है, उसके बाद कांग्रेस का स्थान हो सकता है, जबकि भाजपा और अकाली दल पीछे रह सकते हैं। पंजाब चुनावों के लिए भाजपा के माइक्रो-मैनेजर सीआर पाटिल की देखरेख में आंकड़ों का भारी विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने पूरे राज्य में बूथ-स्तर का विश्लेषण कमीशन किया है और गठबंधन करने या अलग लड़ने दोनों ही परिस्थितियों में भाजपा और अकाली दल की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि यदि दोनों पार्टियों के वोट शेयर को सामूहिक रूप से देखा जाए, तो वे मुकाबले में मजबूती से खड़े नजर आते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गठबंधन की स्थिति में कड़ी सौदेबाजी के लिए भाजपा पंजाब की 117 सीटों में से 80 सीटों पर गहराई से ध्यान केंद्रित कर रही है, हालांकि कुछ नेताओं का यह भी संकेत है कि पार्टी 45 से 50 सीटों पर समझौता कर सकती है। आधिकारिक तौर पर हालांकि भाजपा यह कहती रही है कि वह सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अमित शाह के एनडीए वाले बयान के संदर्भ में सूत्रों का कहना है कि पंजाब के संदर्भ में एनडीए का एकमात्र ज्ञात घटक अकाली दल है, जिसने सितंबर 2020 में नाता तोड़ लिया था। कुछ हलकों का तर्क है कि शाह का इशारा अकाली दल के बागी गुट (सद् पुनरुद्धार) की तरफ हो सकता है, लेकिन यह संभावना कम है क्योंकि यह गुट न तो पंजीकृत है और न ही इसके पास कोई चुनाव चिह्न है।

















