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हिमाचल के आसमान में कम हुए विदेशी पायलट! 250 पैराग्लाइडर बीड़-बिलिंग से लौटे वापस!

कांगड़ा।राजवीर दीक्षित

दुनिया के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में शामिल हिमाचल प्रदेश की बीड़-बिलिंग घाटी में विदेशी पायलटों की आमद घटने लगी है। खराब मौसम और उड़ान पर प्रशासनिक पाबंदियों के चलते यहां पहुंचे करीब 500 विदेशी पैराग्लाइडिंग पायलटों में से आधे से ज्यादा समय से पहले अपने देश लौट गए हैं। इससे प्रदेश के एडवेंचर टूरिज्म को बड़ा झटका लगने की आशंका है।

जानकारी के अनुसार, करीब दो दर्जन देशों से लगभग 500 विदेशी पायलट क्रॉस-कंट्री और लंबी दूरी की उड़ानों का अनुभव लेने बीड़-बिलिंग पहुंचे थे। आमतौर पर 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक का समय पैराग्लाइडिंग का पीक सीजन माना जाता है। इस दौरान दुनिया भर के पायलट धौलाधार की पहाड़ियों में उड़ान भरने और अपनी क्षमता आजमाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मौसम की अनिश्चितता और बार-बार उड़ान गतिविधियां रोके जाने से उनके कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं।

विदेशी पायलट आमतौर पर घाटी में 15 से 20 दिन तक रुकते हैं। इस दौरान होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्तरां और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को अच्छी आमदनी होती है। लेकिन पायलटों के समय से पहले लौटने से स्थानीय पर्यटन कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

स्थानीय होटल कारोबारी अंकित सूद ने कहा कि बीड़-बिलिंग में पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हो पाई हैं। इससे इस विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की अंतरराष्ट्रीय पहचान को नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि बीड़-बिलिंग केवल टेंडम पैराग्लाइडिंग तक सीमित नहीं है। यह स्थान सोलो फ्लाइंग, क्रॉस-कंट्री और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए दुनियाभर के पायलटों के बीच खास पहचान रखता है।

धौलाधार की ऊंची पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों और रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े सुरेश ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रशासन को इस खेल को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन उड़ान संबंधी नियम और प्रशासनिक फैसले तकनीकी विशेषज्ञों तथा पैराग्लाइडिंग से जुड़े लोगों से चर्चा के बाद लिए जाने चाहिए।

उनका मानना है कि यदि मौजूदा अनिश्चितता बनी रही तो भविष्य में विदेशी पायलट बीड़-बिलिंग आने से कतरा सकते हैं। इससे न केवल इस पर्यटन स्थल की अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रभावित होगी, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।

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