द टारगेट न्यूज़:
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं के बीच, राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिखकर अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ 736.96 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच शुरू करने की मांग की है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य की विजिलेंस ब्यूरो ‘आप’ सरकार के अधीन है, जबकि ईडी केंद्र की भाजपा सरकार के तहत काम करती है। इस कदम के जरिए पंजाब सरकार ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है, जो अब यह तय करेगी कि वे अपने संभावित सहयोगी दल के नेता के खिलाफ कैसे कार्रवाई करते हैं। विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, जांच में एक विस्तृत वित्तीय नेटवर्क का पता चला है, जिसका उपयोग कथित तौर पर बेहिसाब धन को छिपाने और उसे वैध बनाने के लिए किया गया था। इस मामले में मजीठिया को कथित तौर पर मास्टरमाइंड और मुख्य लाभार्थी बताया गया है। जांच में सामने आया है कि ड्रग्स से जुड़ी कमाई को विभिन्न घरेलू कंपनियों और विदेशी संस्थाओं (साइप्रस और सिंगापुर) के माध्यम से घुमाया गया। इस धन को संपत्तियों, विमानों और अन्य निवेशों में बदला गया, जो मजीठिया के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर रखे गए थे। दूसरी ओर, बिक्रम मजीठिया ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और दावा किया है कि ये आरोप अदालत में टिक नहीं पाएंगे।


















