चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Signs of NIA entry in LPU violence case! 72-hour ultimatum given to Punjab) लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक महीने पहले हुए हिंसक कैंपस प्रदर्शनों के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को 72 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने का आदेश दिया है। वहीं, केंद्र सरकार को रिपोर्ट मिलने के एक सप्ताह के भीतर यह फैसला करना होगा कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जाए या नहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब पुलिस की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट पर गौर किया। रिपोर्ट में बताया गया कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66F लागू होने की संभावना बनती है। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में यह धारा भी जोड़ दी है।

साइबर आतंकवाद की धारा जुड़ने से बढ़ी गंभीरता
आईटी एक्ट की धारा 66F साइबर आतंकवाद से संबंधित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह धारा NIA एक्ट, 2008 के तहत निर्धारित अनुसूचित अपराधों की सूची में शामिल है। ऐसे मामलों में कानून के मुताबिक राज्य सरकार को रिपोर्ट जल्द से जल्द केंद्र सरकार के पास भेजनी होती है, ताकि केंद्र यह तय कर सके कि मामला NIA को सौंपा जाना चाहिए या नहीं।
याचिकाकर्ता रवि राज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव चोपड़ा ने अदालत का ध्यान NIA एक्ट की धारा 2(g) और धारा 6 की ओर दिलाया। उन्होंने बताया कि आईटी एक्ट की धारा 66F को संशोधन के जरिए NIA एक्ट की अनुसूची में शामिल किया गया है।
NIA जांच पर फैसला केंद्र सरकार के हाथ में
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित अपराध की सूचना मिलने पर राज्य सरकार को रिपोर्ट केंद्र के पास भेजनी होती है। इसके बाद केंद्र सरकार यह निर्धारित करती है कि अपराध NIA एक्ट की अनुसूची के दायरे में आता है या नहीं और क्या उसकी जांच NIA से कराना उचित होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार NIA से जांच कराने का निर्णय लेती है, तो राज्य पुलिस की जांच रोकनी होगी और संबंधित दस्तावेज केंद्र सरकार को सौंपने होंगे।
खंडपीठ ने पाया कि पंजाब सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में NIA एक्ट, 2008 के प्रावधानों पर विचार किए जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसी के बाद अदालत ने राज्य सरकार को 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट केंद्र को भेजने का निर्देश दिया।
17 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट मिलने के एक सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लेने को कहा है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर इस संबंध में हुई कार्रवाई और प्रगति की जानकारी अदालत के सामने रखने का निर्देश दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी को पूरी गंभीरता और तत्परता से कार्रवाई करने की हिदायत भी दी है।
अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है। यदि NIA जांच का आदेश दिया जाता है, तो LPU हिंसा मामले की जांच की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।


















