सोलन । राजवीर दीक्षित
(A new challenge for Baddi’s industries? 600 MW power transfer raises concerns) हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) में बिजली संकट ने उद्योगों की परेशानी बढ़ा दी है। 1 से 31 अक्टूबर तक केरल को 600 मेगावाट बिजली ट्रांसफर करने के प्रस्ताव के बीच औद्योगिक इकाइयों को अघोषित बिजली कटौती और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उत्पादन, मशीनरी और समय पर ऑर्डर पूरे करने की क्षमता पर पड़ रहा है।
एक तरफ बिजली ट्रांसफर की तैयारी, दूसरी तरफ हिमाचल के उद्योग बिजली के लिए परेशान! औद्योगिक प्रतिनिधियों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों तक बिजली गुल रहने से उत्पादन की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हर सप्ताह होने वाली रोटेशनल कटौती के अलावा अब पीक आवर्स में भी अनिश्चित बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं।
नालागढ़ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (NIA) के प्रतिनिधियों के मुताबिक, 2 अक्टूबर से हालात ज्यादा बिगड़े हैं। उद्योगों को यह तक स्पष्ट नहीं होता कि बिजली कब जाएगी और कब बहाल होगी। ऐसे में उत्पादन की योजना बनाना और निर्धारित समय पर माल तैयार करना मुश्किल हो गया है।
उद्योगों का सवाल है—जब बिजली ही भरोसेमंद नहीं होगी, तो उत्पादन और निवेश कैसे बढ़ेगा?
NIA के सलाहकार आर.जी. अग्रवाल ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को घरेलू उपकरणों की तरह बार-बार बंद और चालू नहीं किया जा सकता। बिजली की अचानक आपूर्ति रुकने से मशीनरी को नुकसान, तैयार हो रहे बैच की बर्बादी और डिलीवरी में देरी हो सकती है। इसके चलते कंपनियों को आर्थिक नुकसान, पेनल्टी और ग्राहकों का भरोसा खोने का खतरा भी रहता है।
NIA के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि लगातार बिजली कटौती से उत्पादन लागत बढ़ रही है और हिमाचल के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो रही है। औद्योगिक क्षेत्र राज्य को बिजली ड्यूटी, GST और अन्य करों के माध्यम से राजस्व देने के साथ-साथ हजारों लोगों की आजीविका और सहायक व्यवसायों को भी सहारा देता है।
मामले में बिजली की उपलब्धता के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। HPSEBL के एक अधिकारी के अनुसार, बद्दी औद्योगिक क्लस्टर को लगभग 245 MVA बिजली की जरूरत होती है। गुरुवार सुबह 7 से 10:30 बजे के बीच 30 MVA की कमी दर्ज की गई, जबकि स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर ने सुबह 10 बजे से दोपहर के बीच 90 MVA की अतिरिक्त कमी बताई।
इस संकट की गंभीरता नालागढ़ की एक स्पिनिंग मिल के रिकॉर्ड से भी सामने आती है। सितंबर महीने में यहां 32 बार बिजली जाने के कारण कुल 10.47 घंटे तक आपूर्ति बाधित रही।
विवाद के बीच राज्य सरकार की 12 प्रतिशत फ्री बिजली रॉयल्टी को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से बेचने का फैसला भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस व्यवस्था से HPSEBL को पहले दिए जा रहे 2.92 रुपये प्रति यूनिट के मुकाबले अधिक कमाई हो रही है।
अब उद्योग संगठनों ने मांग की है कि बिजली निर्यात से पहले औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बिजली निर्यात व्यवस्था की समीक्षा, सभी औद्योगिक फीडरों का तत्काल ऑडिट और 30 दिनों के भीतर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने की मांग उठाई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि बिजली की कमी का बोझ आखिर हिमाचल के अपने उद्योग कब तक उठाते रहेंगे?


















