चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“A smartphone made of brass, more expensive than gold! Weighs 8 kg and priced at ₹25 crore”) इतिहास और विज्ञान का अनोखा संगम एक बार फिर चर्चा में है। जयपुर की शाही विरासत से जुड़ा 17वीं सदी का एक दुर्लभ खगोलीय यंत्र ‘एस्टरोलैब’ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियां बटोर रहा है। इस ऐतिहासिक धरोहर को 29 अप्रैल को Sotheby’s, लंदन में नीलामी के लिए पेश किया जाएगा।
पीतल से बना यह विशाल यंत्र उस दौर का “सुपर कंप्यूटर” या “प्राचीन स्मार्टफोन” माना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी बोली 15 से 25 करोड़ रुपये तक जा सकती है, जो इसे बेहद खास और कीमती बनाता है।
यह एस्टरोलैब कभी सवाई मानसिंह II के निजी संग्रह का हिस्सा था और बाद में महारानी गायत्री देवी के पास रहा। अब पहली बार इसे सार्वजनिक नीलामी में लाया जा रहा है, जिससे दुनियाभर के संग्रहालय और कलेक्टर्स इसे खरीदने के लिए उत्साहित हैं।
इस यंत्र की खासियतें इसे और भी अनमोल बनाती हैं। 17वीं सदी में खगोलविद इसका उपयोग सूर्योदय-सूर्यास्त का समय जानने, तारों की स्थिति मापने, इमारतों की ऊंचाई और कुओं की गहराई तक निकालने के लिए करते थे। इतना ही नहीं, इससे मक्का की दिशा तय करने और सटीक कुंडलियां बनाने में भी मदद मिलती थी।
करीब 8.2 किलोग्राम वजनी और 46 सेंटीमीटर ऊंचा यह एस्टरोलैब सामान्य यंत्रों से चार गुना बड़ा है। इसे लाहौर के दो कारीगर भाइयों ने बनाया था। इस पर तारों के नाम फारसी और संस्कृत (देवनागरी लिपि) में लिखे गए हैं, जो उस समय के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक समन्वय को दर्शाते हैं।
इसमें 94 शहरों के अक्षांश-देशांतर इतनी सटीकता से दिए गए हैं कि आज भी वैज्ञानिक हैरान रह जाते हैं। यही कारण है कि यह ऐतिहासिक धरोहर अब पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।



















