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रूपनगर में आवारा कुत्तों के हमले से 8 वर्षीय बच्ची की मौत, NHRC ने पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट

चंडीगढ़/रूपनगर । राजवीर दीक्षित

(An 8-year-old girl died after being attacked by stray dogs in Rupnagar; the NHRC has sought a report from the Punjab government.)राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब के रूपनगर जिले में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में आठ वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत के मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है। आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना 10 जून को रूपनगर जिले के मोरिंडा कस्बे में हुई थी। बताया गया है कि बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने किसी तरह बच्ची को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया और इलाज के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

गंभीर रूप से घायल बच्ची को बाद में पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि बच्ची आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखती थी। उसके पिता का करीब चार वर्ष पहले निधन हो चुका था, जबकि उसकी मां घरेलू कामकाज कर परिवार का पालन-पोषण कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, घटना उस समय हुई जब बच्ची पास की दुकान से दूध लेने गई थी। इसी दौरान करीब 10 आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। परिजनों ने बताया कि उस समय उसकी मां घर पर बड़ी बेटी और छोटे बेटे की देखभाल कर रही थी। बच्ची के चाचा के मुताबिक, कुत्तों ने उसके सिर सहित शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें पहुंचाई थीं।

उन्होंने बताया, “बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और फिर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।”

बताया जा रहा है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई, जिसके बाद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। स्थानीय निवासियों ने नगर निकायों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर लगातार लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों ने मोरिंडा के एसडीएम चेतन बांगड़ को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

नगर परिषद के पार्षदों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए ठोस और प्रभावी नीति बनाना, पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा खतरनाक आवारा कुत्तों और आवारा पशुओं को पकड़कर निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजना शामिल है।

इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को मानव जीवन और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग अब यह भी जानना चाहता है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

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