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आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-13): आज के पूज्य देव (भगवान शिव), पूजा विधान एवं महात्म्य

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-13): आज के पूज्य देव (भगवान शिव), पूजा विधान एवं महात्म्य

टारगेट न्यूज़ धर्म-अध्यात्म: 2026-10-13 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान शिव की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान शिव

आज का दिन देवाधिदेव महादेव की आराधना और मानसिक शांति के लिए अत्यंत उत्तम है। दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए भगवान शिव के स्मरण से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर सदाधर्म और परोपकार के मार्ग पर चलना ही सच्चा मानवीय धर्म है।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद चंदन अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक एक सौ आठ बार जाप करें। अंत में धूप, दीप जलाकर विधिवत आरती करें और अपने समस्त पापों के नाश के लिए प्रार्थना करें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय महाशिवरात्रि के दिन एक निषादराज नामक बहेलिया अपने शिकार की तलाश में जंगल गया और रात्रि में बेल के पेड़ पर शरण ली। अनजाने में उसने पेड़ के पत्ते तोड़े जो सीधे नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिरे, जिससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उसने रात्रि भर जागकर और भूखे रहकर अनजाने में ही शिव आराधना का पूर्ण पुण्य प्राप्त किया। भगवान शिव ने अंततः उसे मोक्ष और अपनी लोक में स्थान प्रदान किया। यह कथा दर्शाती है कि सच्चे मन से किया गया देवाराध्य कभी निष्फल नहीं होता।

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