चंबा । राजवीर दीक्षित
(Accidents during Manimahesh Yatra: Two pilgrims lose their lives in two days)मणिमहेश यात्रा के दौरान लगातार दूसरे दिन एक और श्रद्धालु की मौत हो गई। भरमौर सब-डिविजन में मंगलवार को झील के पास एक यात्री की संदिग्ध दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी। इसके अगले दिन बुधवार को गौरीकुंड में लंगर सेवा कर रहे दूसरे यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
केदारनाथ यात्रा मार्ग के गौरीकुंड में लंगर सेवा कर रहे पंजाब के पठानकोट निवासी सूचा सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। 51 वर्षीय सिंह लंगर परोसने में जुटे थे, तभी उनकी तबीयत खराब हो गई। मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक तौर पर मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल पाएगा। फिलहाल शव को गौरीकुंड से नीचे लाने की प्रक्रिया जारी है।
इससे पहले मंगलवार को तीर्थयात्रा के दौरान हरियाणा के अंबाला जिले के फतेहगढ़ निवासी 55 वर्षीय मनमोहन लाल की सांस लेने में दिक्कत के चलते मौत हो गई। वह सोमवार शाम दोस्तों के साथ हेलीकॉप्टर से भरमौर से गौरीकुंड पहुंचे थे। इसके बाद वे पैदल डल झील की ओर रवाना हुए थे।
बताया जा रहा है कि यह ग्रुप झील के पास एक टेंट में ठहरा हुआ था। इसी दौरान लाल को अचानक सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। उसके साथ मौजूद दोस्तों ने उसे तत्काल नजदीकी मेडिकल कैंप तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और उसने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना के बाद SDRF की टीम मौके पर पहुंची और शव को भरमौर ले आई। इसके बाद पोस्टमार्टम करवाया गया और आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव उसके साथियों को सौंप दिया।
चंबा में दो दिन के भीतर दो श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की है। एसपी विजय सकलानी ने बताया कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक लाल की मौत कार्डियक अरेस्ट से होने की आशंका है। उन्हें पहले से हृदय संबंधी बीमारी थी और उपचार के दौरान स्टेंट भी डाला गया था। प्रशासन ने यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और लंगर सेवा में शामिल लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
मणिमहेश यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें। भरमौर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट विकास शर्मा ने श्रद्धालुओं से मेडिकल चेकअप करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मणिमहेश झील तक का सफर चुनौतीपूर्ण है और यात्रियों को काफी ऊंचाई तक चढ़ना पड़ता है। गंभीर बीमारी से पीड़ित श्रद्धालु यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें और रास्ते में किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत मेडिकल सहायता प्राप्त करें।
मणिमहेश यात्रा आस्था के साथ-साथ कठिन पहाड़ी सफर की भी परीक्षा है। करीब 4,085 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हडसर से खड़ी और कठिन चढ़ाई पार करनी पड़ती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी, कड़ाके की ठंड और मौसम में अचानक बदलाव जोखिम बढ़ा सकते हैं। खासकर बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह सफर काफी मुश्किल साबित हो सकता है।
तीर्थयात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने इस बार कड़े इंतजाम किए हैं। प्रतिदिन केवल 5,000 श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा रात के समय आवाजाही प्रतिबंधित है और कुगती गांव से गुजरने वाला परिक्रमा मार्ग भी बंद है।



















