जालंधर | राजवीर दीक्षित
(Bhagat expressed concern over the deterioration of brotherhood) बंद की प्रस्तावित कॉल को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज होती नजर आ रही है। भाजपा नेता कीमती भगत ने बंद के समय को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि नवरात्र के अंतिम दिनों में पंजाब से गुजरने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने किसान जत्थेबंदियों से भी बंद के समर्थन पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
नवरात्र के अंतिम दिनों में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही
कीमती भगत ने कहा कि इन दिनों नवरात्र चल रहे हैं और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता चिंतपूर्णी, ज्वाला जी, चामुंडा देवी, नैना देवी और वैष्णो देवी जैसे धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि 21 और 22 तारीख नवरात्र के अंतिम दिन हैं, जबकि 23 और 24 तारीख को श्रद्धालुओं की वापसी होगी। ऐसे समय में बंद की कॉल से यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
जाम और विवाद की स्थिति बनने की जताई आशंका
कीमती भगत ने कहा कि हिमाचल से वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं और बच्चों को अगर घंटों लंबे जाम में फंसना पड़ा तो इससे लोगों को भारी परेशानी होगी। उन्होंने आशंका जताई कि रास्तों पर भीड़ और तनाव के कारण बहसबाजी या विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, ऐसे संवेदनशील समय में किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहिए जिससे पंजाब के आपसी भाईचारे पर असर पड़े।
किसान संगठनों से बंद पर पुनर्विचार की अपील
बंद को किसान संगठनों की ओर से मिले समर्थन पर भी कीमती भगत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसान नेता भी पंजाब के ही भाई हैं और उन्हें नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भावनाओं और उनकी व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने किसान जत्थेबंदियों से अपील की कि वे बंद के समर्थन के अपने फैसले पर एक बार फिर विचार करें, ताकि आम लोगों और धार्मिक यात्रियों को परेशानी से बचाया जा सके।
कौमी मोर्चा के युवाओं की गिरफ्तारी पर भी बोले
कौमी मोर्चा के नौजवानों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कीमती भगत ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन आता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर नौजवान शांतिपूर्ण तरीके से राज्यपाल को ज्ञापन देने जा रहे थे, तो केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन को मामले को संवेदनशीलता और संयम के साथ संभालना चाहिए था।
कुल मिलाकर, कीमती भगत ने बंद की बजाय बातचीत और संवेदनशीलता के जरिए विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया है।



















