चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
Big BJP Statement on Bhullar: “Who is the Mann Government Trying to Protect by Removing This Honest, Blue-Eyed Officer?” अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए गए गुरप्रीत सिंह भुल्लर को लेकर पंजाब की सियासत गरमा गई है। भुल्लर को पद से हटाए जाने के एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें ‘ईमानदार अधिकारी’ बताते हुए आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
BJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जिस अधिकारी ने कथित तौर पर देश विरोधी साजिशों और पाकिस्तान से जुड़े लिंक का सच सामने रखा, उसे अचानक पद से क्यों हटाया गया? पार्टी ने सवाल किया कि आखिर भगवंत मान सरकार किसे बचाना चाहती है?
BJP ने आरोप लगाया कि हिंसक साजिशों से जुड़े खुलासे के तुरंत बाद सरकार की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। बीजेपी का यह बयान भुल्लर के उस कथित बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जोड़ने की बात कही थी।
तीन दशक से ज्यादा लंबा पुलिस करियर
गुरप्रीत सिंह भुल्लर 1991 बैच के पंजाब पुलिस सर्विसेज (PPS) अधिकारी हैं। उन्होंने पटियाला में DSP के तौर पर पंजाब पुलिस में अपना करियर शुरू किया और वर्ष 2004 में IPS अधिकारी बने। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में भुल्लर ने पंजाब की अलग-अलग सरकारों के दौरान महत्वपूर्ण पुलिस पदों पर काम किया। उन्हें शांत स्वभाव, कूटनीतिक रवैये और बेहतर संवाद क्षमता के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि, हालिया कार्रवाई को लेकर पंजाब पुलिस ने दावा किया कि उनका बयान ‘गलत तरीके से समझा गया’। भुल्लर पुलिस परिवार की तीसरी पीढ़ी से आते हैं। उनके पिता गुरइकबाल सिंह भुल्लर और दादा भी पंजाब पुलिस में सेवा दे चुके हैं।
152 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति ने खींचा था ध्यान
साल 2016 में भुल्लर उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे, जब अधिकारियों द्वारा दाखिल संपत्ति विवरण में उनकी पैतृक जमीन, कमर्शियल प्लॉट और आवासीय संपत्तियों की कुल घोषित कीमत 152 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। उस समय उन्हें देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले IPS अधिकारियों में गिना गया था। अपने लंबे करियर के दौरान भुल्लर ने मुक्तसर, मोगा, रोपड़, जालंधर, लुधियाना ग्रामीण और बठिंडा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में SSP के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। SAS नगर यानी मोहाली के गठन के बाद वे वहां सबसे लंबे समय तक SSP रहने वाले अधिकारियों में प्रमुख रहे। सितंबर 2009 से नवंबर 2013 तक उन्होंने पहली बार चार साल से अधिक समय तक यह जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2015-16 में उन्होंने दोबारा मोहाली SSP का पद संभाला।
जालंधर और लुधियाना में भी संभाली कमान
कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान भुल्लर ने मई 2017 में SSP Vigilance और SSP Jalandhar-Rural की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 30 सितंबर 2018 को वह जालंधर के पुलिस कमिश्नर बने। 22 सितंबर 2021 को उन्होंने लुधियाना के पुलिस कमिश्नर का पद संभाला। बाद में आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान वह Anti-Gangster Task Force (AGTF) और रोपड़ रेंज में DIG के पद पर भी रहे।
अमृतसर CP पद से अचानक हटाए गए
भुल्लर ने 2023 के आखिर में अमृतसर के पुलिस कमिश्नर का पद संभाला था। 2024 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय AAP उम्मीदवार कुलदीप सिंह धालीवाल की हार के बाद उन्हें कुछ समय के लिए इस पद से हटाया गया, लेकिन बाद में उन्होंने दोबारा अमृतसर पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाल ली। दिसंबर 2024 में स्वर्ण मंदिर में SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले के बाद भी भुल्लर विवादों में रहे। बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने हमले को सहानुभूति हासिल करने के लिए रचा गया बताने की बात कही थी और FIR दर्ज करने में करीब छह घंटे की देरी हुई।
जंतर-मंतर वाले बयान के बाद बढ़ा विवाद
अब शुक्रवार को भुल्लर को अचानक अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया और उन्हें DGP कार्यालय चंडीगढ़ में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब 4 अगस्त को भुल्लर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल की कथित रेकी और ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पंजाब की AAP सरकार और विपक्षी BJP के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। भुल्लर को हटाए जाने के बाद अब BJP लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है। वहीं, पूरे मामले में भुल्लर का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुल्लर को अचानक हटाने के पीछे असली वजह क्या है—एक कथित तौर पर गलत समझा गया बयान या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद?



















