द टारगेट वेब डेस्क
(“Offline Chat Apps “) इंटरनेट बंद हो जाए या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप पड़ जाए, तब भी क्या मैसेज भेजे जा सकते हैं? हाल ही में सामने आई जानकारी ने इस सवाल को चर्चा का विषय बना दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने ऐसे ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया, जो बिना इंटरनेट, सिम कार्ड या मोबाइल नेटवर्क के भी एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखने में सक्षम हैं।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन से एक दिन पहले कुछ व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक “डिजिटल गाइड” साझा की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि प्रदर्शन क्षेत्र में इंटरनेट बंद किया जा सकता है या जैमर लगाए जा सकते हैं। इसलिए लोगों को पहले से ही Bridgefy, Briar, FireChat और BitChat जैसे ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी गई थी।
फिलहाल साइबर सेल इस मामले की गहन जांच कर रहा है। जब्त किए गए मोबाइल फोन की फोरेंसिक क्लोनिंग की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन ऐप्स के जरिए किस तरह के संदेश भेजे गए और किन लोगों के बीच संवाद हुआ। जांच एजेंसियां चैट हिस्ट्री को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं।
इन ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये इंटरनेट की बजाय ब्लूटूथ, वाई-फाई डायरेक्ट या मेश नेटवर्क तकनीक का उपयोग करते हैं। Bridgefy लगभग 100 मीटर की दूरी तक ब्लूटूथ के जरिए दूसरे डिवाइस से कनेक्ट हो सकता है। Briar बिना किसी केंद्रीय सर्वर के सुरक्षित और निजी चैट की सुविधा देता है। FireChat आसपास मौजूद डिवाइसों को जोड़कर ऑफलाइन मैसेजिंग संभव बनाता है, जबकि BitChat ब्लूटूथ मेश तकनीक के जरिए टेक्स्ट और मल्टीमीडिया संदेश भेजने में मदद करता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीकें आपदा, प्राकृतिक संकट या नेटवर्क फेल होने जैसी परिस्थितियों में भी उपयोगी हो सकती हैं। वहीं, यदि इनका इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए किया जाता है, तो जांच एजेंसियां डिजिटल फोरेंसिक के जरिए इसकी पड़ताल कर सकती हैं। इसलिए किसी भी तकनीक का उपयोग हमेशा कानून और जिम्मेदारी के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।



















