चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Close associates of the Badals to join BJP today; a blow to SAD!) पंजाब की सियासत में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों आज भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। वह अपने बेटे अमरवीर सिंह बावा के साथ भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं।
मेजर भूपिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने का कार्यक्रम सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय में रखा गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में उनके पार्टी में शामिल होने की बात कही जा रही है। सैनी के दौरे को देखते हुए भाजपा कार्यालय और आसपास सुरक्षा भी बढ़ाई गई है।
बादल परिवार के रहे करीबी
मेजर भूपिंदर सिंह को प्रकाश सिंह बादल के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। वह बादल सरकार में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला हुआ था।
वह सुखबीर सिंह बादल के करीबियों में भी रहे हैं। ऐसे में उनका भाजपा में जाना शिरोमणि अकाली दल के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जून में सैनी ने घर जाकर की थी मुलाकात
मेजर भूपिंदर सिंह से इसी साल जून में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर मुलाकात की थी। उस समय वह रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।
मेजर भूपिंदर सिंह ने उस दौरान बताया था कि पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल उनसे कई बार मिलने पहुंचे थे। बाद में सुखबीर सिंह बादल ने भी उनके आवास पर मुलाकात की थी।
भाजपा के लिए 2027 से पहले अहम कदम
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा लगातार अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बादल परिवार के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता का भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
सेना में रहे मेजर
राजनीति में आने से पहले मेजर भूपिंदर सिंह भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण लिया था और वर्ष 1969 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था।
इसके बाद वह प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सचिव बने और अकाली-भाजपा सरकार के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
मेजर भूपिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने से पंजाब की सियासत में अकाली दल और भाजपा के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।



















