चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
चंडीगढ़ की एक अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित रिश्वत मामले में बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है।
अदालत ने सेवानिवृत्त जस्टिस रंजीत सिंह, SAD नेता बिक्रम मजीठिया और कांग्रेस नेता सुखपाल खैहरा को अगले
आदेश तक सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से गुरप्रीत कौर से संबंधित असत्यापित और कथित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से रोक दिया है।
यह आदेश गुरप्रीत कौर की ओर से दाखिल मानहानि और स्थायी निषेधाज्ञा संबंधी मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सिविल जज, जूनियर डिवीजन, चंडीगढ़ प्रिक्षित ने पारित किया।
मामले में अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 20 अगस्त को सेवानिवृत्त जस्टिस रंजीत सिंह की ओर से कथित तौर पर एक दुष्कर्म मामले के आरोपी से 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने से संबंधित आरोप लगाए गए।
याचिका के मुताबिक, इन दावों को सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए प्रसारित किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
गुरप्रीत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि बिक्रम मजीठिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके खिलाफ कथित अभियान चलाया और संबंधित सामग्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुई।
अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि फिलहाल सामने रखी गई पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें किसी ठोस प्रमाण से पुष्ट नहीं दिखाई देतीं। कोर्ट ने प्रतिष्ठा के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित पोस्ट और वीडियो को हटाने या डिलीट कराने की मांग पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
इस संबंध में पहले प्रतिवादियों को नोटिस दिया जाएगा और उनके पक्ष को सुनने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।



















