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67 दिन का प्रवास पूरा कर धर्मशाला लौटे दलाई लामा, कांगड़ा एयरपोर्ट पर हुआ शानदार स्वागत

धर्मशाला । राजवीर दीक्षित

(Dalai Lama returns to Dharamshala after completing a 67-day tour; receives a grand welcome at Kangra Airport)तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा शुक्रवार को अपने दो महीने सात दिन लंबे लद्दाख प्रवास को पूरा कर धर्मशाला लौट आए। सुबह कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचने पर तिब्बती समुदाय के लोगों, श्रद्धालुओं, समर्थकों और स्थानीय निवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट से मैक्लोडगंज स्थित आवास तक कई जगह लोग सड़क किनारे खड़े रहे और उनका अभिनंदन किया। उनकी वापसी को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दिया। लंबे प्रवास के बाद धर्मशाला लौटे दलाई लामा के स्वागत ने शहर के माहौल को भी खास बना दिया।
दलाई लामा के धर्मशाला लौटने पर कांगड़ा एयरपोर्ट पर विशेष स्वागत समारोह आयोजित किया गया। तिब्बती प्रशासन के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें तिब्बती चीफ जस्टिस कमिश्नर येशी वांगमो और स्पीकर डोलमा सेरिंग तेखांग शामिल थीं, ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट के बाहर कलाकारों के दल ने शुभ माने जाने वाले पारंपरिक ताशी शोलपा नृत्य की प्रस्तुति दी। उनके आगमन की खबर फैलते ही एयरपोर्ट से धर्मशाला स्थित आवास तक के प्रमुख स्थानों पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

दलाई लामा की वापसी पर मैक्लोडगंज में खास स्वागत समारोह
दलाई लामा के धर्मशाला स्थित मैक्लोडगंज आवास पर उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों के साथ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सचिवों ने उनका अभिनंदन किया। आवास के प्रवेश द्वार पर उपसभापति, न्याय आयुक्तों, मंत्रियों और तीनों स्वायत्त निकायों के प्रमुख भी मौजूद रहे। उनकी एक झलक पाने और स्वागत करने के लिए वहां उत्सुकता का माहौल बना रहा।

घुटने की सर्जरी के बाद फिर सक्रिय हुए दलाई लामा, लद्दाख में किया लंबा प्रवास
दलाई लामा के लिए 8 जून का दिन स्वास्थ्य के लिहाज से अहम रहा, जब दिल्ली में उनके बाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण किया गया। सर्जरी के बाद उन्होंने दिल्ली में रहकर स्वास्थ्य लाभ लिया। चिकित्सकों की सलाह और स्वास्थ्य में सुधार के बाद 28 जून के बाद वह लद्दाख के लिए रवाना हुए। अगले दो महीने सात दिनों तक उन्होंने लद्दाख में धार्मिक शिक्षाओं, जनदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान उनका 91वां जन्मदिन भी विशेष रूप से मनाया गया, जिसमें उन्होंने लेह के कालचक्र टीचिंग ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।

लद्दाख में दलाई लामा के लिए हुआ विशेष दीर्घायु प्रार्थना समारोह, विदाई में उमड़ा समुदाय
लद्दाख में अपने प्रवास के दौरान दलाई लामा कई धार्मिक आयोजनों का हिस्सा बने। उन्होंने स्टोक और गोंपा गांव में बुद्ध प्रतिमा तथा स्तूप के समक्ष आयोजित प्रार्थना कार्यक्रमों में भाग लिया। महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर के बुद्ध गार्डन का भी उन्होंने दौरा किया।

लद्दाख बौद्ध संघ, लद्दाख गोंपा संघ और तिब्बती समुदाय की संयुक्त पहल पर दलाई लामा के लिए दीर्घायु प्रार्थना समारोह आयोजित किया गया। धर्मशाला लौटने से पहले कालचक्र टीचिंग ग्राउंड में धन्यवाद और विदाई कार्यक्रम हुआ, जिसमें स्थानीय लोगों ने उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। दलाई लामा के पूरे प्रवास के दौरान उनसे मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

विभिन्न आयु और सामाजिक वर्गों से आए 21,572 लोगों ने इस दौरान दलाई लामा के दर्शन किए और उनसे मुलाकात का अवसर पाया। धर्मशाला लौटने के साथ ही मैक्लोडगंज और आसपास के तिब्बती समुदाय में धार्मिक गतिविधियों की रौनक एक बार फिर बढ़ गई है।

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