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फोरलेन के मलबे से बदलेगी हिमाचल की सूरत! जानिए क्या है सरकार की तैयारी

मंडी । राजवीर दीक्षित

(Debris from four-laning projects set to transform Himachal’s landscape! Find out what the government is planning) हिमाचल प्रदेश में फोरलेन निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे और डंपिंग साइटों को लेकर अब एक नई पहल की तैयारी की जा रही है। जिन स्थानों का इस्तेमाल अब तक निर्माण से निकलने वाले मलबे को जमा करने के लिए किया जाता था, उन्हें भविष्य में खूबसूरत पार्कों और खेल मैदानों के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे न केवल जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी नई सार्वजनिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को बिलासपुर में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस संबंध में अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी सभी फोरलेन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR में डंपिंग साइटों के पुनर्विकास से जुड़े प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएं। इसका उद्देश्य निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी इन स्थलों का उपयोग जनहित में सुनिश्चित करना है, ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ स्थानीय नागरिकों और युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।

अब निर्माण के बाद मलबे के ढेरों को भी विकास के अवसर में बदलने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत उपयुक्त डंपिंग स्थलों को हरित क्षेत्रों, पार्कों और खेल मैदानों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को घूमने-फिरने और युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मिल सकते हैं। हालांकि, इन स्थलों का विकास उनकी तकनीकी उपयुक्तता, सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर करना होगा।

बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। परौर और पद्धर के बीच प्रस्तावित फोरलेन की अलाइनमेंट को जल्द अंतिम रूप देने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही शिमला-मटौर फोरलेन के लंबित खंडों के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए, ताकि परियोजना से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण भुभु जोत सुरंग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी जल्द तैयार करने को कहा गया। इस सुरंग से संबंधित योजना को आगे बढ़ाने से क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने की संभावनाओं को बल मिल सकता है।

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने चंबा-भरमौर मार्ग को पूरी तरह सुदृढ़ करने और शिमला-पिंजौर-नालागढ़ मार्ग के रुके हुए निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया। इन मार्गों की स्थिति में सुधार से संबंधित क्षेत्रों में आवागमन को बेहतर बनाने और सड़क यात्रियों को सुविधा देने में मदद मिल सकती है। बैठक में अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति पर ध्यान देने और लंबित कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा, कांगड़ा जिले के जसूर में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का कार्य युद्ध स्तर पर पूरा करने को कहा गया। फ्लाईओवर का निर्माण पूरा होने से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क पर आवागमन को सुगम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। बैठक में स्थानीय स्तर पर पैदल यात्रियों की सुविधा से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया। विधायक रणधीर शर्मा ने जगातखाना और कलर में फुटब्रिज बनाने का आग्रह किया, जिस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

कुल मिलाकर, इस समीक्षा बैठक में हिमाचल प्रदेश के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ निर्माण के बाद डंपिंग साइटों के बेहतर इस्तेमाल, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय जनसुविधाओं पर भी ध्यान देने की बात सामने आई। अब इन निर्देशों को धरातल पर लागू करने और संबंधित परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने की दिशा में अधिकारियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

 

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