चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Assembly E-20 Petrol Debate Sparks Fresh Political Row “) पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान E-20 पेट्रोल को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में दावा किया कि एथेनॉल मिश्रित E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से 67 प्रतिशत वाहनों का माइलेज कम हुआ है, जबकि 47 प्रतिशत वाहनों के इंजन प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दावा 45 हजार वाहनों पर किए गए एक सर्वे के आधार पर किया गया है।

सीएम मान ने आरोप लगाया कि E-20 पेट्रोल को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह के लोगों पर लागू किया गया। उनका कहना था कि पहले E-10 इंजन वाले वाहनों को अचानक E-20 पेट्रोल के दायरे में लाया गया, जबकि इसके प्रभावों को लेकर कोई व्यापक और पारदर्शी अध्ययन सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की भी मांग की।
विधानसभा में इस मुद्दे पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के बीच भी तीखी बहस हुई। वित्त मंत्री ने पुराने वाहनों पर E-20 के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराने, प्रभावित वाहन मालिकों को राहत देने और एथेनॉल रहित पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही। वहीं, कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि एथेनॉल का प्रयोग कोई नया प्रयोग नहीं है और यह कई वर्षों से चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि एथेनॉल उद्योग से किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला है।
बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए। सदन में कई बार माहौल गर्म हो गया और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी शायरी के जरिए माहौल को हल्का करने की कोशिश की, लेकिन E-20 पेट्रोल का मुद्दा पूरे सत्र की सबसे चर्चित बहसों में शामिल रहा।
अब यह मामला केवल पेट्रोल की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैज्ञानिक शोध, वाहन सुरक्षा, किसानों के हित और केंद्र-राज्य की नीतियों से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया भी अहम मानी जा रही है।



















