द टारगेट न्यूज़:
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को मोगा से आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक और पार्टी की पंजाब महिला विंग की अध्यक्ष डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा के दोनों आवासों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मोगा जिले में सरकारी भूमि के अधिग्रहण में कथित धोखाधड़ी और सार्वजनिक धन के गबन के सिलसिले में पंजाब भर में सात परिसरों में की जा रही तलाशी का हिस्सा है। ईडी की टीमें सुबह करीब 6 बजे पहुंचीं। यह कार्रवाई 2027 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हो रही है, जिसके लिए ‘आप’ ने उन्हें मोगा से फिर से उम्मीदवार बनाया है। ईडी अधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ यूनिट मोगा में सरकारी और संस्थागत संपत्तियों के फर्जी अधिग्रहण और सार्वजनिक धन के गबन के संबंध में ये तलाशी ले रही है। एजेंसी ने पंजाब पुलिस द्वारा जून 2024 में नेशनल हाईवे 754A के लिए अधिग्रहित सरकारी भूमि के फर्जी म्यूटेशन और मुआवजे के गलत वितरण को लेकर दर्ज एफआईआर के आधार पर एक एन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। ईडी के अनुसार, तलाशी के दायरे में आने वाले परिसर अमनदीप अरोड़ा, उनके पति डॉ. राकेश अरोड़ा, परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और डॉ. राकेश से जुड़े एक नशा मुक्ति अस्पताल से जुड़े हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ यूनिट्स की ईडी टीमें सुरक्षा बलों के साथ पहुंची थीं। विधायक घर पर थीं और उनसे पूछताछ की जा रही थी। उनके आवास के बाहर समर्थकों ने एकत्र होकर केंद्रीय एजेंसी और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। यह एफआईआर 16 जून 2024 को धर्मकोट पुलिस स्टेशन में मोगा के अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) के कार्यालय की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसमें किशनपुरा कलां राजस्व मंडल के पटवारी नवदीप सिंह और एक निजी लाभार्थी दिलखुश कुमारी का नाम है। हालांकि, उपलब्ध विवरण के अनुसार, एफआईआर में विधायक या उनके परिवार का नाम नहीं है। शिकायत के अनुसार, धर्मकोट तहसील के अदरमान गांव में एनएच 754A परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहित की गई थी और तहसीलदार के मूल्यांकन रजिस्टरों के आधार पर दिलखुश कुमारी को 1,00,65,724 रुपये का मुआवजा दिया गया था। बाद की जांच में पता चला कि यह भूमि पंजाब सरकार की थी। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने मुआवजे को हड़पने के लिए फर्जी म्यूटेशन बनाने और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करने की साजिश रची थी। मोहाली की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने पुष्टि की थी कि म्यूटेशन दस्तावेजों पर तत्कालीन तहसीलदार के हस्ताक्षर जाली थे। विधायक के करीबी सहयोगियों ने दावा किया कि इस मामले से अमनदीप का कोई लेना-देना नहीं है और आरोप लगाया कि यह छापा उन्हें भाजपा या शिअद में शामिल होने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से मारा गया है। स्थानीय ‘आप’ नेताओं ने भी इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। विधायक या उनके परिवार की ओर से अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है और ईडी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि कोई दस्तावेज या नकदी बरामद हुई है या नहीं।


















