टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए काम करने वाले और गिरोह के ‘लॉजिस्टिक्स मैनेजर’ के रूप में पहचाने जाने वाले कर्मवीर सिंह देव को कनाडा से डिपोर्ट कर दिया गया है। देव पर आरोप है कि वह बिश्नोई गैंग के सदस्यों को फर्जी यात्रा दस्तावेज मुहैया कराने में मुख्य भूमिका निभाता था। भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब उससे पूछताछ की तैयारी कर रही हैं।
गैंग का मास्टरमाइंड और फर्जी दस्तावेजों का खेल
कर्मवीर सिंह देव पर हत्या, जबरन वसूली और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, देव ने ही अनमोल बिश्नोई समेत गैंग के कई बड़े गुर्गों के लिए फर्जी पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज तैयार करवाए थे। वह लंबे समय से कनाडा में छिपकर गैंग के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
भारत से कैसे फरार हुआ था देव?
सूत्रों के मुताबिक, देव ने भारत में एक म्युनिसिपल चुनाव विवाद के बाद फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके देश छोड़ा था। तब से वह विदेश में बैठकर लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक साम्राज्य को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट दे रहा था। उसकी गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन को सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
एजेंसियों का मानना है कि कर्मवीर सिंह देव से होने वाली पूछताछ में उन रास्तों और नेटवर्क का खुलासा हो सकता है, जिनका इस्तेमाल करके कुख्यात अपराधी भारत से फरार होकर विदेशों में शरण ले रहे हैं।
प्रमुख बिंदु:
- कर्मवीर सिंह देव लॉरेंस बिश्नोई गैंग का प्रमुख लॉजिस्टिक्स मैनेजर था।
- अनमोल बिश्नोई के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाने में उसकी भूमिका संदिग्ध है।
- भारत में उस पर हत्या और जबरन वसूली के कई मामले दर्ज हैं।
- कनाडा से उसकी वापसी से गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।
फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां देव को हिरासत में लेकर उससे विस्तृत पूछताछ करने की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। यह घटनाक्रम कनाडा और भारत के बीच चल रहे आपराधिक प्रत्यर्पण के मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।



















