चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Chandigarh Protest: FIR Against 3000 Supporters, Security Lapse Raises Big Questions “) चंडीगढ़ में सांसद अमृतपाल सिंह के समर्थकों द्वारा निकाले गए प्रदर्शन के बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी आवास के करीब तक पहुंचने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत 15 नामजद नेताओं और करीब 2500 से 3000 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था भंग की, बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। वहीं प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारी उस पर भी कब्जा करते दिखाई दिए।

इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। रिटायर्ड डीजीपी ए.पी. पांडे का कहना है कि चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस के बीच बेहतर तालमेल और मजबूत ग्राउंड इंटेलिजेंस की जरूरत थी। उनके अनुसार, प्रदर्शन पहले से घोषित था, इसलिए पुलिस को अधिक प्रभावी रणनीति और पर्याप्त बल की तैनाती करनी चाहिए थी।
दूसरी ओर, चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों के नेताओं के संपर्क में था और उन्हें मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि कुछ लोग हथियारों के साथ पहुंचे और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी।
अब इस पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस प्रदर्शन के वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है तथा जरूरत पड़ने पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला पंजाब और चंडीगढ़ की राजनीति के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।



















