चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“The foreign minister may be stripped of the post! Iran is caught in internal conflict amid rising war tensions”) अमेरिका के साथ भीषण तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बाद जारी शांति वार्ता के बीच ईरान की राजनीति में बड़ा संकट उभरता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की शीर्ष नेतृत्व टीम के भीतर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और संसद के स्पीकर मुहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ अपने ही विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अराघची पर आरोप है कि वे राष्ट्रपति कार्यालय को दरकिनार कर सीधे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में उनकी भूमिका एक स्वतंत्र मंत्री की बजाय सैन्य नेतृत्व के सहयोगी जैसी नजर आई है, जिससे सरकार के भीतर असंतोष बढ़ गया है। यही आंतरिक खींचतान अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता में भी बड़ी बाधा बन रही है।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन इस बात से नाराज हैं कि विदेश मंत्री उन्हें जरूरी जानकारी साझा नहीं कर रहे। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि यही स्थिति जारी रही, तो वे सख्त कदम उठाते हुए अराघची को पद से हटा सकते हैं। यह कदम ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
वहीं, स्पीकर ग़ालिबाफ़ से भी अपील की गई है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति मजबूत करने के लिए कड़ा रुख अपनाएं। दरअसल, अमेरिका के साथ तनाव और लगातार लग रही पाबंदियों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हो चुकी है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
कुल मिलाकर, ईरान इस समय दोहरे संकट से जूझ रहा है—एक तरफ बाहरी दबाव और दूसरी तरफ अंदरूनी सत्ता संघर्ष। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इस संकट को संभाल पाती है या राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती है।



















