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बाटा को महंगा पड़ा 6 रुपये का कैरी बैग! अदालत ने ठोका 10,000 रुपये का जुर्माना

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“A ₹6 Carry Bag Cost Bata Dear! Court Imposes ₹10,000 Penalty “) एक मामूली 6 रुपये के कैरी बैग ने देश की बड़ी फुटवियर कंपनी Bata India को कानूनी मुश्किल में डाल दिया है। दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने एक महिला ग्राहक की शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंपनी को 10,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया है।

मामला साल 2023 का है, जब दिल्ली की रहने वाली प्रीति अग्रवाल ने Bata स्टोर से 1,499 रुपये के जूते खरीदे थे। बिलिंग के दौरान उनसे एक पेपर कैरी बैग के लिए 6 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। ग्राहक का आरोप था कि स्टोर में कहीं भी ऐसा कोई नोटिस नहीं लगा था, जिसमें यह बताया गया हो कि कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लिया जाएगा। उनका कहना था कि खरीदारी पूरी होने के बाद ग्राहक के पास बैग लेने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचता।

मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने माना कि खुदरा विक्रेता बिना ब्रांड वाले साधारण कैरी बैग के लिए शुल्क ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए ग्राहकों को पहले से स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। आयोग ने कहा कि स्टोर में उचित सूचना न होने के कारण ग्राहक को खरीदारी से पहले सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर नहीं मिला, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

Bata ने अपनी सफाई में कहा कि कैरी बैग एक अलग उत्पाद था, जिस पर MRP अंकित थी और ग्राहक की सहमति से ही उसे दिया गया था। हालांकि आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि स्टोर में सूचना का अभाव कंपनी की बड़ी चूक है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी चंडीगढ़ और जयपुर में इसी तरह के मामलों में Bata को फटकार मिल चुकी है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि छोटी राशि भी अगर गलत तरीके से वसूली जाए तो ग्राहक न्याय हासिल कर सकता है।

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