टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) से जुड़े 20 लाख रुपये के बहुचर्चित घूसकांड मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई पर विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला करीब तीन साल पुराना है, जब FSL में आरटी-पीसीआर (RT-PCR) और डीएनए (DNA) किट की खरीद के दौरान कथित तौर पर रिश्वत मांगने और भुगतान करने का आरोप लगा था। इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बावजूद जांच की धीमी गति पर सवाल उठ रहे हैं। याचिकाकर्ता ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसी से उन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है जो अब तक की जांच में अनसुलझे हैं। अदालत का मानना है कि सरकारी खरीद में इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों की तह तक जाना आवश्यक है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट का समयबद्ध तरीके से पेश होना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु
- मामला: FSL में किट खरीद के दौरान 20 लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी।
- याचिका: जांच को CBI को स्थानांतरित करने की मांग।
- वर्तमान स्थिति: हाईकोर्ट ने पुलिस से विस्तृत हलफनामा तलब किया।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर, 2026 को निर्धारित की गई है।
अब देखना यह होगा कि आगामी सुनवाई में पुलिस द्वारा पेश किया जाने वाला हलफनामा अदालत को संतुष्ट कर पाता है या नहीं, और क्या यह मामला सीबीआई को सौंपा जाएगा।



















