चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(HC cracks the whip on DA arrears! Chief Secretary summoned) पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया महंगाई भत्ते (DA/DR) के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला हाईकोर्ट के पहले के उस आदेश के अनुपालन से जुड़ा है, जिसमें लंबित DA/DR किस्तें जारी करने को कहा गया था।
HC के आदेश के बाद भी मामला क्यों अटका?
3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और PSPCL को कर्मचारियों व पेंशनर्स की लंबित DA/DR किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुरूप जारी करने और निर्धारित समय में भुगतान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने देरी होने की स्थिति में 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज का भी प्रावधान किया था।
इसके बाद पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार ने दलील दी कि करीब ₹14,191 करोड़ के बकाये को इतनी कम अवधि में जारी करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।
सरकार बोली- आपसी सहमति से सुलझा रहे मामला
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच सितंबर में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बैठक में 8 प्रतिशत अतिरिक्त DA जारी करने पर सहमति बनी, जिससे DA 42 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया। इसकी घोषणा के मुताबिक बढ़ा हुआ DA सितंबर के वेतन में शामिल होकर अक्टूबर में मिलने वाला था।
हालांकि, लंबित पुराने DA एरियर के भुगतान पर उस बैठक में अंतिम फैसला नहीं हुआ था।
कर्मचारियों की मांग क्या है?
कर्मचारी संगठन लंबे समय से लंबित DA किस्तों और एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। अगस्त-सितंबर में इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन और सामूहिक अवकाश जैसे आंदोलन भी किए।
अब 5 अक्टूबर को होगी अहम सुनवाई
हाईकोर्ट ने अब चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दौरान सरकार को DA/DR मामले में अदालत के पहले के निर्देशों के अनुपालन और मौजूदा स्थिति पर जवाब देना होगा।
फिलहाल मामले का केंद्र बिंदु लंबित DA/DR और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर है, जबकि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत भी जारी है।



















