चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(High Court setback for Bajwa; bail rejected!) रियल एस्टेट कारोबारी और बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह बाजवा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जुड़ा है।
खरीदारों के पैसे के इस्तेमाल पर ED के गंभीर आरोप
ED के अनुसार, बाजवा डेवलपर्स की परियोजनाओं में घर और प्लॉट खरीदने वाले कई लोगों को समय पर दस्तावेज नहीं मिले और न ही उन्हें संपत्ति का कब्जा दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से मिली रकम को संबंधित प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान प्लॉट नंबर बदलने और एक ही संपत्ति को एक से अधिक लोगों को बेचने के आरोप भी सामने आए। ED के मुताबिक ऐसे 45 मामलों में FIR दर्ज थी, जिसके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई।
ED की रेड में करोड़ों की रकम फ्रीज
मई 2025 में ED ने जरनैल सिंह बाजवा और उनसे जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान बाजवा, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों में करीब 3.31 करोड़ रुपए फ्रीज किए गए।
तलाशी के दौरान करीब 42 लाख रुपए नकद भी मिलने की बात सामने आई। इसके अलावा ED को रेंज रोवर, BMW, लैंड क्रूजर और पोर्श समेत कई वाहन मिले, जिनकी कुल कीमत करीब 1.07 करोड़ रुपए बताई गई।
₹662.49 करोड़ की ‘अपराध की आय’ का दावा
ED ने बाजवा डेवलपर्स के 2019-20 के वित्तीय रिकॉर्ड और विभिन्न लोगों के बयानों के आधार पर करीब 662.49 करोड़ रुपए की अपराध की आय का अनुमान लगाया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय जमीन खरीदने, संबंधित कंपनियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा के कर्ज देने, पारिवारिक कंपनियों और निजी कामों में किया गया।
जमानत पर कोर्ट का फैसला
मामले में हाईकोर्ट ने ED की जांच से जुड़े रिकॉर्ड और आरोपों को देखते हुए जरनैल सिंह बाजवा की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले में ED के आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं; इन आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

















