शिमला । राजवीर दीक्षित
(Himachal’s hill model now goes nationwide! ‘Three suggestions’ to be included in PMGSY-5) नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY को और अधिक आधुनिक, टिकाऊ और पारदर्शी बनाने को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता से जुड़े कई मुद्दों पर मंथन हुआ। इस दौरान हिमाचल प्रदेश ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए तीन अहम नीतिगत संशोधन प्रस्तावित किए। हिमाचल का दावा है कि इन सुझावों से केवल पहाड़ी राज्यों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ग्रामीण सड़क व्यवस्था को फायदा मिल सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि हिमाचल के इन सुझावों को PMGSY-5 की आगामी गाइडलाइन में शामिल किया जा सकता है।
हिमाचल के ये तीन सुझाव सड़क निर्माण की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा जवाबदेह, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने पर केंद्रित हैं।
शिविर को संबोधित करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह चिंतन शिविर केवल एक औपचारिक आयोजन बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मंथन का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को समझना और उनके ठोस समाधान तलाशना होना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विजन का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक देशभर में करीब 8.50 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों ने गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर और तकदीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस राष्ट्रीय चिंतन शिविर में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, विभिन्न राज्यों के मुख्य अभियंता और उद्योग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश की ओर से PMGSY के एक्सईएन डीके नाग ने प्रदेश की ओर से सुझाव और अनुभव बैठक के सामने रखे।
हिमाचल का पहला सुझाव सीधे तौर पर ठेकेदारी व्यवस्था में बदलाव से जुड़ा है।
प्रदेश ने अपनी नई राज्य नीति का हवाला देते हुए प्रस्ताव रखा कि किसी एक ठेकेदार को एक समय में दो से ज्यादा और कुल मिलाकर सात से अधिक काम आवंटित नहीं किए जाने चाहिए। हिमाचल ने इस नीति के फायदे को समझाने के लिए कांगड़ा जिले का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। बताया गया कि खराब गुणवत्ता के कारण वहां पांच काम रद्द किए गए। हिमाचल के मुताबिक, ठेकेदारों के पास कामों का एकाधिकार खत्म होने के बाद बाहरी कंपनियों को भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अवसर मिला और प्रतिस्पर्धा बढ़ी। प्रदेश ने इसी व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने की पैरवी की है, ताकि अधिक कंपनियां प्रतिस्पर्धा में आएं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हो।
दूसरा सुझाव सड़क निर्माण से पहले ड्रेनेज की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को लेकर है।
हिमाचल ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था को नजरअंदाज करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। प्रदेश में खराब ड्रेनेज व्यवस्था के कारण वर्ष 2023 में करीब 2400 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 में करीब 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसी अनुभव को आधार बनाते हुए हिमाचल ने मांग की है कि सड़क निर्माण से पहले हाइड्रोलॉजिकल सर्वे को अनिवार्य किया जाए। इसके आधार पर PMGSY की DPR यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में 0.60 मीटर चौड़ी ट्रैपेजाइडल ड्रेन का प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
यानी सड़क बनाने से पहले यह तय हो कि बारिश का पानी सड़क को नुकसान पहुंचाए बिना बाहर कैसे निकलेगा।
हिमाचल का तीसरा सुझाव सड़क सुरक्षा से जुड़ा है। प्रदेश ने पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सड़क हादसों को रोकने के लिए PMGSY के तहत एक अलग रोड सेफ्टी बजट का प्रावधान करने की मांग की है। इसके तहत एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक PMGSY सड़क के कुल प्रोजेक्ट बजट का एक प्रतिशत हिस्सा सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया गया है। इस राशि का इस्तेमाल साइन बोर्ड, पैरापिट और क्रैश बैरियर जैसी सुरक्षा सुविधाओं के निर्माण पर किया जा सकेगा।
हिमाचल के तीनों सुझावों का मकसद साफ है—बेहतर ठेकेदारी व्यवस्था, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और सुरक्षित सड़कें।
अब इन प्रस्तावों पर केंद्र सरकार के स्तर पर आगे विचार किया जाएगा। अगर हिमाचल के सुझाव PMGSY-5 की आगामी गाइडलाइन में शामिल होते हैं, तो पहाड़ी राज्य में अपनाई जा रही इन व्यवस्थाओं को देशभर की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में लागू करने का रास्ता खुल सकता है। इससे सड़क निर्माण में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ बारिश से होने वाले नुकसान को कम करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।


















