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ऊना में फिर गरमाया अस्पताल का मामला, महिला की मौत के बाद सड़क पर प्रदर्शन

ऊना । राजवीर दीक्षित

(Hospital issue flares up again in Una; protest on the road following a woman’s death) हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में गर्भवती महिला रीना और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित डॉक्टर के खिलाफ व्यापक कार्रवाई न होने से नाराज परिजनों ने शनिवार को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। टांडा में पोस्टमार्टम के बाद रीना का शव ऊना पहुंचते ही स्वजन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने रेड लाइट चौक पर एंबुलेंस रोककर धरना दिया।

प्रदर्शन के कारण नेशनल हाईवे धर्मशाला-चंडीगढ़ और ऊना-हमीरपुर राज्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया। परिजन डॉक्टर प्रियंका को तत्काल निलंबित करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।

परिजनों का सवाल है कि आखिर उनकी शिकायत पर अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मामला क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के मातृ-शिशु देखभाल केंद्र से जुड़ा है, जहां 33 वर्षीय रीना को प्रसव पीड़ा के बाद चार दिन पहले भर्ती करवाया गया था। महिला की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया था। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि सीएमओ, एमएस और अन्य स्टाफ को ऑपरेशन थिएटर की खिड़कियों से बाहर निकलकर बचाव करना पड़ा।

करीब चार घंटे के घटनाक्रम के बाद पुलिस ने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बावजूद परिजन संतुष्ट नहीं हैं और डॉक्टर को पूछताछ के लिए बुलाने तथा गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं।

रीना के पति राजीव कुमार, निवासी अपर अरनियाला, ने बताया कि पत्नी के पहले के अल्ट्रासाउंड में मां और बच्चे की स्थिति सामान्य बताई गई थी। उनके अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने जांच के दौरान बच्चे की धड़कन नहीं मिलने की बात कही। राजीव का आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर से पहले मां की जान बचाने की गुहार लगाई, लेकिन रीना को अल्ट्रासाउंड के लिए भेज दिया गया।

राजीव का दावा है कि इस दौरान इलाज में महत्वपूर्ण समय निकल गया और पहले गर्भस्थ शिशु तथा बाद में रीना की भी मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चार दिन के उपचार के दौरान डॉक्टर का व्यवहार ठीक नहीं था।

फिलहाल, परिजनों के आरोपों और इलाज में कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच इस मामले में बेहद अहम है। परिवार की मांग है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

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