चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“No More Kothi Culture? “) चंडीगढ़ में अब अपना ड्रीम प्लॉट खरीदकर मनचाही कोठी बनाना आसान नहीं रहेगा। शहर के संशोधित मास्टर प्लान में बड़ा बदलाव करते हुए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब नए प्लॉटेड डेवलपमेंट की जगह ग्रुप हाउसिंग और हाई-डेंसिटी फ्लैट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी आने वाले समय में चंडीगढ़ में लोगों को प्लॉट नहीं, बल्कि मल्टीस्टोरी फ्लैट ज्यादा देखने को मिलेंगे।
प्रशासन का कहना है कि चंडीगढ़ लगभग पूरी तरह बस चुका है और जमीन की भारी कमी हो रही है। इसी वजह से फेज-2 और फेज-3 के कई खाली इलाकों को अब ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि सेक्टर-43 के पास करीब 78 एकड़ क्षेत्र को नए विकास में शामिल किया गया है, जबकि फेज-3 में लगभग 146 एकड़ जमीन पर 4 से 6 मंजिला हाई-डेंसिटी फ्लैट्स बनाने की तैयारी है।
इतना ही नहीं, बाहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत प्लॉटिंग पर भी लगभग रोक लगा दी गई है। अब ज्यादा आबादी को बसाने के लिए फ्लैट आधारित मॉडल अपनाया जाएगा। प्रशासन ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को भी करीब 215 एकड़ जमीन दी है, जहां भविष्य में बड़े रिहायशी प्रोजेक्ट तैयार होंगे। गांव मलोया के पास 178 एकड़ भूमि पर हाई-राइज इमारतों की योजना बनाई जा रही है।
इंडस्ट्रियल एरिया में भी नए नियम लागू किए गए हैं। FAR बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है और मजदूरों व कर्मचारियों के लिए हॉस्टल और डॉर्मिटरी बनाने की अनुमति दी गई है। वहीं पार्किंग की समस्या को कम करने के लिए स्टिल्ट पार्किंग को बढ़ावा मिलेगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या चंडीगढ़ की पहचान बदलने जा रही है? क्या आने वाले समय में “सिटी ब्यूटीफुल” भी दूसरे बड़े शहरों की तरह फ्लैट कल्चर वाला शहर बन जाएगा? यही चर्चा अब पूरे शहर में तेज हो चुकी है।



















