चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
(“A newborn ‘little prince’ in the desert receives Z+ security.” ) गुजरात के कच्छ के तपते रेगिस्तान में एक बेहद खास मेहमान ने जन्म लिया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह कोई आम पक्षी नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे दुर्लभ प्रजातियों में से एक Great Indian Bustard का नन्हा चूजा है। इस खास मेहमान की सुरक्षा के लिए ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जैसे किसी बड़े नेता को Z+ सुरक्षा दी जाती है।
करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद इस प्रजाति के परिवार में बढ़ोतरी हुई है। 26 मार्च 2026 को जन्मे इस चूजे को बचाने के लिए वन विभाग ने सख्त सुरक्षा घेरा तैयार किया है। 50 से ज्यादा जवानों को तीन शिफ्ट में तैनात किया गया है, जो दिन-रात इसकी निगरानी कर रहे हैं। पूरे इलाके को ‘नो-मेंस लैंड’ घोषित कर दिया गया है, जहां आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है।
सिर्फ यही नहीं, वॉच टावरों से दूरबीन और आधुनिक उपकरणों की मदद से हर पल नजर रखी जा रही है। इसकी जानकारी सीधे उच्च अधिकारियों तक भेजी जा रही है। चूजे को शिकारियों से बचाने के लिए अनोखे उपाय भी अपनाए गए हैं। आसपास के जल स्रोतों को सूखा दिया गया है, ताकि जंगली जानवर उस क्षेत्र में न आ सकें।
इसके अलावा इलाके की टूटी हुई बाड़ को ठीक किया गया है और ग्रामीणों को मवेशी चराने से रोका गया है। मादा गोडावण पर भी ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया है, ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
वन विभाग की यह पहल न सिर्फ इस नन्हे जीवन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दुर्लभ प्रजाति को बचाने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद भी है।



















