हरोली । राजवीर दीक्षित
(Major solar energy project at Una’s Bulk Drug Park; 14.2 MW generation capacity.)हरोली के बल्क ड्रग पार्क में ऊर्जा का नया मॉडल तैयार हो रहा है। पोलियां बीत में विकसित किए जा रहे इस औद्योगिक परिसर में 14.2 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर सिस्टम लगाने की योजना है। इसके लिए अलग से जमीन खोजने की जरूरत नहीं होगी। पार्क में मौजूद व्यावसायिक भवनों की छतों से लेकर विद्युत उपयोगिता क्षेत्र और ट्रीटमेंट यूनिटों तक सोलर पैनल लगाए जाएंगे। यह पहल पार्क को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
प्रस्तावित योजना के तहत बीडीपी की आंतरिक सड़कों और बफर क्षेत्रों में बैटरी बैकअप वाले सोलर पैनल लगाने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। सोलर सिस्टम से दिन के समय पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी में सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिसका उपयोग आवश्यकता के अनुसार बाद में किया जा सकता है। इसके साथ ही उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपने परिसरों, खासकर भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित करने की योजना है। इससे न केवल ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि पारंपरिक बिजली स्रोतों पर दबाव भी कम किया जा सकेगा।
पार्क में बनेगा मजबूत पावर नेटवर्क
औद्योगिक पार्क को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए डीपीआर में छह विद्युत सब स्टेशनों का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक सब स्टेशन 20 एमवीए क्षमता का होगा और सभी की संयुक्त क्षमता 120 एमवीए रहेगी। यहां से आठ 11 केवी फीडर निकाले जाएंगे, जो सीधे औद्योगिक इकाइयों तक बिजली पहुंचाएंगे। इससे पार्क में उद्योगों के संचालन के लिए बेहतर और व्यवस्थित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
बीडीपी को औद्योगिक गतिविधियों का मजबूत केंद्र बनाने के लिए बिजली आपूर्ति को पुख्ता किया जा रहा है। प्रस्तावित 60 उद्योगों को चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए नए सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिससे परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
बीडीपी में प्रस्तावित 60 उद्योगों को ध्यान में रखते हुए बिजली व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है। उद्योगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए नए सब स्टेशनों की स्थापना की जाएगी। इनके लिए भूमि का चयन हो चुका है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।



















