मंडी । राजवीर दीक्षित
(Medical treatment or overcharging in hospitals? Prices of medical supplies raise serious questions) मंडी जिले के निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की बढ़ी हुई कीमतों का भी सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों और उनसे जुड़े मेडिकल स्टोरों पर ग्लव्स, सिरिंज, आईवी सेट, कैथेटर और ऑक्सीजन मास्क जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम थोक बाजार की कीमतों से काफी अधिक होने की बात सामने आई है।
मरीजों को एमआरपी पर 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट का उल्लेख बिल में किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद वास्तविक थोक दर की तुलना में भुगतान की जाने वाली राशि तीन से चार गुना तक अधिक बताई जा रही है।
इलाज के दौरान जब मरीज पहले ही अस्पताल के भारी खर्च से जूझ रहा होता है, ऐसे में छोटी-छोटी मेडिकल वस्तुओं पर अतिरिक्त भुगतान उसकी आर्थिक परेशानी और बढ़ा सकता है।
सिरिंज-आईवी सेट के नाम पर मरीजों की जेब पर बड़ा वार!
सदर मंडी और आसपास के निजी स्वास्थ्य केंद्रों व दवा दुकानों की पड़ताल में मेडिकल सामान की कीमतों को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आरोप है कि थोक बाजार में महज 3 से 5 रुपये में मिलने वाली सिरिंज मरीजों को 15 से 20 रुपये तक में बेची जा रही है।
वहीं करीब 20 रुपये लागत वाले आईवी सेट, यानी ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली, के लिए मरीजों से 80 से 100 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और उनके तीमारदार अक्सर इलाज को प्राथमिकता देते हैं और बिल पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में छोटी-छोटी मेडिकल वस्तुओं पर बढ़ी कीमत का बोझ सीधे मरीज की जेब पर पड़ता है।सवाल यह है कि अगर सामान की वास्तविक कीमत इतनी कम है, तो मरीजों से कई गुना रकम क्यों वसूली जा रही है?
पैकेज के नाम पर अस्पतालों में बिलिंग का खेल?
सुंदरनगर उपमंडल के कुछ निजी अस्पतालों में इलाज के तय पैकेज को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सर्जिकल सामान की कीमत भी पूरे पैकेज में जोड़ दी जाती है, जिससे मरीज के परिजनों को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि किस सामान की वास्तविक कीमत कितनी है।
विस्तृत बिल की मांग करने पर भी कथित तौर पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीज इलाज का पूरा भुगतान कर रहा है, तो उसे खर्च का पूरा ब्यौरा क्यों नहीं मिलना चाहिए?
मेडिकल सामान की कीमतों में बड़ा अंतर, 15 रुपये का ग्लव्स 100 रुपये तक बिल में दर्ज
नेरचौक और सुंदरनगर क्षेत्र के निजी क्लीनिकों में मरीजों को दिए जाने वाले मेडिकल सामान की कीमतों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, 12 से 15 रुपये प्रति जोड़ी की थोक कीमत वाले सर्जिकल ग्लव्स के लिए मरीजों से 50 से 100 रुपये तक वसूले जाने की बात कही जा रही है।इसके अलावा कैथेटर और ऑक्सीजन मास्क की कीमतों में भी लागत की तुलना में 200 से 300 प्रतिशत तक का अंतर होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इलाज के कुल खर्च में ऐसे छोटे-छोटे मेडिकल सामान की कीमतें भी काफी बढ़ जाती हैं। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा बिलिंग प्रक्रिया और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की जांच की मांग उठ सकती है।
इंप्लांट के नाम पर लाखों की वसूली? ‘देसी-विदेशी’ के खेल पर उठे सवाल
स्टंट से लेकर आर्थोपेडिक और कार्डियक इंप्लांट तक… मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इन मेडिकल उपकरणों की कीमत और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कहा जा रहा है कि कई मामलों में तीमारदारों को इंप्लांट की कंपनी, मॉडल, वास्तविक कीमत और प्रमाणिकता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
‘देसी’ और ‘विदेशी’ के नाम पर कीमतों में भारी अंतर दिखाकर मरीजों की जेब पर बोझ डाले जाने के आरोप हैं। अगर इंप्लांट की कीमत और गुणवत्ता में पारदर्शिता है, तो मरीजों को इसकी पूरी जानकारी देने में परेशानी क्यों?



















