इसकी आवक 14,402 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल 1,03,541 क्यूसेक थी। पंडोह से डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 7,504 क्यूसेक रहा, जबकि पिछले साल यह 1,04,405 क्यूसेक था। वहीं, भाखड़ा-सतलुज लिंक (BSL) परियोजना में इस साल 6,471 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह शून्य था।
रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध की स्थिति भी कमजोर रही। इसका जलस्तर 514.59 मीटर दर्ज हुआ, जबकि पिछले साल यह 526.86 मीटर था। यानी 12.27 मीटर की कमी रही।
रणजीत सागर बांध में पानी की आवक महज 7,073 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल यह 1,63,037 क्यूसेक थी। पानी की निकासी 10,738 क्यूसेक और डायवर्जन 1,694 क्यूसेक रहा। पिछले साल डायवर्जन 10,479 क्यूसेक था।
15 सितंबर तक बारिश पर टिकी उम्मीद
प्रमुख जलाशयों के संयुक्त आंकड़े बताते हैं कि इस साल मानसून के दौरान पानी की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में काफी कमजोर है। जलाशयों में पानी भरने की प्रक्रिया 15 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि मानसून के बचे हुए हफ्तों में बेहतर बारिश और कैचमेंट क्षेत्रों से अधिक पानी की आवक होगी, जिससे जलाशयों का भंडारण स्तर सुधर सकेगा।
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